जलजले में जमींदोज गांव, देवदूत बन राणो ने बचा ली जिंदगियां, तबाही की रौंगटे खड़े करने वाली दास्तां
आंखों में आंसू हैं और दिल में वो जख्म जो शायद कभी नहीं भर सकता। ये हिमाचल के वो परिवार हैं जिन्होनें दो दिन पहले अपना सब कुछ अपनी आंखों के सामने तबाह होते हुए देखा। सब कुछ ठीक था, सुबह से बारिश हो रही थी । रेड अलर्ट था लेकिन किसे पता था ये कि ये रेड अलर्ट उनकी जिंदगी की सारी पूंजी को बहा कर ले जाएगा। दो दिन पहले करीब 11 बजे शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली बोह घाटी में कुदरत ने ऐसा तांडव मचाया कि कई परिवार बेघर हो गए हैं। यहां बादल फटा था, जिसने घाटी के धारकंडी क्षेत्र के बोह, रौन, सपेड़ा और घड़घू में भयंकर तबाही मचाई। कई परिवारों का यहां सब खत्म हो गया, न सिर छिपाने की जगह बची न खाने को अनाज- जिस घर को सालों मेंहनत से बनाया वो आखों के सामने बह गया। बस बच पाई तो जिंदगियां। एक महिला की सूझबूझ ने यहां कई जिंदगियों को बचा लिया.. राणो देवी जिनका घर- बार पशुधन सब उस सैलाब में बह गया।
लेकिन अपने आँखों के सामने अपने गांव को तबाह होने से राणों देवी ने बचा लिया, जब बोह घाटी के गड़गून गांव में हर तरफ बारिश हो रही थी, सब अपने घरों में थे किसी ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि बाहर जो जलजला आ रहा है वो सब तबाह करके ले जाने को तैयार है, ऐसे में गांव की ही एक महिला राणों ने जब गांव के साथ बहने वाले नाले को देखा तो वो समझ गई कि ये साधारण बारिश नहीं हैं. ये नाला अब तबाही मचा सकता है बस फिर क्या था, महिला ने अपनी पूरी जान लगा दी, लोगों को आवाजे लगाई, जोर जोर से चिल्लाई और कई लोगों को घरों से बाहर निकाला। किसी ने बच्चों को गोद में उठाया, किसी ने बुजुर्गों का हाथ पकड़ा और सभी सुरक्षित जगह की ओर दौड़ पड़े। जान बच गई लेकिन राणो देवी और उनके गांव के कई परिवारों को इस त्रासदी में सब ख्त्म हो गया। अब बचा है तो बस आंखों में पानी और अपने घर आंगन की याद।
जिला कांगड़ा का ये ऐसा इलाका है जहां पहले भी कई बार तबाही आ चुकी है। कुछ साल पहले भी यहां कई घर मलबे में समा गए थे और कुछ लोगों की जान तक चली गई थी, और एक बार फिर ये इलाका उसी त्रासदी को झेल रहा है। न घर है न पशुधन बचा और न ही गहने, बस जो तन पर पहने थे वही कपड़े रह गए। फिलहाल आपदा के बाद शासन प्रशासन सक्रिय हो गया है। बीते रोज सीएम ने भी डीसी से बात की थी और हालात का जायजा लिया था। अब इन परिवारों का आसरा बोह की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 160 प्रभावित लोगों के ठहरने की व्यवस्था यहां की हुई है। डीसी खुद मौके पर पहुंचे हुए थे। स्थानीय विधायक भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
लोगों से बात कर उन्होनें भी दर्द जाना, तो वहीं धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर आपदा प्रभावितों से मुलाकात की और 25- 25 हजार की राहत राशि भी दी। प्रशासन भी राहत राशि दे रहा है। अपने स्तर पर सरकार हर सहायता उपलब्ध करवाने की बात कह रही है। लेकिन यहां खतरा अभी भी टला नहीं है। बताया जा रहा है कि गढ़गून और भंगार गांव जमींदोज हो चुके हैं। पहाड़ अब भी दरक रहा है। स्पैड़ा गांव पर खतरा लगातार बना हुआ है। प्रशासन ने एहतियातन तीनों गांव खाली करवा दिए हैं। लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं और बस भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि दोबारा ये आपदा की घड़ी किसी को न दिखाए। क्योंकि यहां अब कुछ शेष नहीं बचा है। न घर न सड़क न खेत न पेयजल योजनाएं न बिजली के खंबे, बस बचे हैं तो आंखों में आसूं और तबाही का दर्दनाक कहानी, जिसने बस जिंदगी बख्श दी और बाकी सब पल भर में उजाड़ दिया।
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