अशोकधाम मंदिर

By: Aug 22nd, 2026 12:35 am

अशोकधाम के वर्तमान मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन 11 फरवरी 1993 को जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने किया था। आज मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, नंदी और देवी दुर्गा के मंदिर भी हैं…

बिहार के लखीसराय जिले में स्थित अशोकधाम मंदिर भगवान शिव के प्रमुख आस्था केंद्रों में गिना जाता है। इसे इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। सावन के महीने और खासकर सावन सोमवार के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं। जिला प्रशासन के अनुसार सावन और शिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त जुटते हैं।

गिल्ली-डंडा खेलते समय मिला था विशाल शिवलिंग-अशोकधाम मंदिर की सबसे खास बात इसका रोचक इतिहास है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, 7 अप्रैल 1977 को अशोक नाम के एक लडक़े ने गिल्ली-डंडा खेलते समय जमीन के नीचे हजारों लाखों साल पुराना विशाल शिवलिंग देखा था। बाद में इस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया और अशोक के नाम पर इसका नाम अशोकधाम पड़ा।

1993 में हुआ मंदिर परिसर का पुनर्निर्माण-मंदिर के इतिहास से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं में इस स्थान को प्राचीन शिव उपासना केंद्र भी बताया जाता है। कुछ ऐतिहासिक और धार्मिक स्रोतों में यहां पाल काल से शिव पूजा की परंपरा होने का उल्लेख मिलता है, इस स्थान को प्राचीन शिव उपासना केंद्र भी बताया जाता है। अशोकधाम के वर्तमान मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन 11 फरवरी 1993 को जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने किया था। आज मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, नंदी और देवी दुर्गा के मंदिर भी हैं।

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भीड़- अशोक धाम मंदिर में सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। सावन के दौरान मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है। ये मंदिर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मुंडन संस्कार के लिए भी प्रसिद्ध है। यही वजह है कि अशोक धाम सिर्फ लखीसराय ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी आस्था का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। अशोकधाम की पहचान केवल एक प्राचीन धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि विशाल शिवलिंग और उससे जुड़ी आस्था की कहानी के कारण भी है। स्थानीय स्तर पर इसे बिहार के प्रमुख शिवधामों में माना जाता है और कई श्रद्धालु इसे ‘बिहार का बाबाधाम’ भी कहते हैं। सावन सोमवार के अवसर पर यहां भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App