फूलगोभी के भाव गिरे फिर भी उम्मीद बरकरार

By: Aug 29th, 2026 12:53 am

पिछले साल खेतों में सड़ गई थी फसल, इस बार राहत भरा रहा सीजन, मौसम मेहरबानय पुराने घाटे की भरपाई की आस

कार्यालय संवाददाता-पतलीकूहल
लाहुल घाटी में सब्जियों की खेती करने वाले उत्पादकों के लिए इस साल का सीजन राहत और उम्मीद लेकर आया है। पिछले वर्ष जहां समय पर मंडियां और बाजार नहीं मिलने तथा मौसम की मार के कारण खेतों में ही फूलगोभी समेत अन्य सब्जियां सड़ गई थीं, वहीं इस बार मौसम अब तक किसानों पर मेहरबान बना हुआ है। शुरुआती दौर में फूलगोभी के दाम करीब 50 रुपए प्रति किलो तक मिलने के बाद अब भाव घटकर लगभग 35 रुपए प्रति किलो रह गए हैं। इसके बावजूद उत्पादक इस भाव को संतोषजनक मान रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि इस बार फसल से पिछले साल हुए भारी नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो जाएगी। लाहुल के किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष सब्जी की फसल ने उन्हें आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित किया था। खेतों में तैयार फसल समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाई और बड़ी मात्रा में फूलगोभी सहित अन्य सब्जियां खेतों में ही सड़ गई थीं।

इससे किसानों को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। हालात यह रहे कि कई उत्पादक बीज, खाद, दवाइयों और अन्य कृषि सामग्री के साथ.साथ अपने परिवार के राशन तक का भुगतान समय पर नहीं कर पाए थे। कई किसानों पर पुराने खर्चों का बोझ आज भी बना हुआ है। इस बार परिस्थितियां कुछ बेहतर नजर आ रही हैं। मौसम साथ देने के कारण फसल की गुणवत्ता भी अच्छी बताई जा रही है। शुरुआती दिनों में फूलगोभी का भाव 50 रुपए किलो तक पहुंचने से उत्पादकों के चेहरों पर खुशी लौट आई थी। हालांकि अब भाव करीब 35 रुपए किलो रह गया है, लेकिन किसानों का कहना है कि यदि बाजार में मांग बनी रही और फसल का उठान नियमित होता रहा तो यह सीजन उनके लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

सब्जी उत्पादन में नेपाली मजदूरों की भी अहम भूमिका

लाहौल की सब्जी उत्पादन व्यवस्था में नेपाली मजदूरों की भी अहम भूमिका है। घाटी की खेती-बाड़ी काफी हद तक नेपाली श्रमिकों के सहारे चलती है। खेत तैयार करने से लेकर रोपाई, निराई-गुड़ाई, फसल की कटाई और पैकिंग तक के अधिकांश कार्यों में नेपाली श्रमिक किसानों का साथ देते हैं। पिछले वर्ष फसल खराब होने के कारण किसानों के सामने नेपाली श्रमिकों को वापस भेजने का किराया जुटाना तक मुश्किल हो गया था। किसानों के अनुसार उस समय सब्जी की बिक्री नहीं होने से आर्थिक संकट इतना गहरा था कि मजदूरों के नेपाल लौटने का किराया देने में भी परेशानी आई थी। इस वर्ष किसानों को उम्मीद है कि अच्छी फसल और बेहतर बाजार भाव से उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी। उत्पादकों का कहना है कि यदि मौसम आगे भी इसी तरह साथ देता रहा तो इस सीजन में पिछले साल का घाटा काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। किसानों को यह भी उम्मीद है कि इस बार फसल से न केवल बीज, खाद और दवाइयों का पुराना हिसाब चुकता होगा, बल्कि नेपाली श्रमिकों समेत अन्य बकाया भुगतान भी पूरे किए जा सकेंगे।


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