एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर के पक्ष में नहीं केंद्र सरकार, SC में दाखिल किया हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, मांग संबंधी याचिकाएं खारिज करने का आग्रह
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। सरकार ने उन जनहित याचिकाओं का विरोध किया है, जिनमें एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने और सरकारी नौकरियों में अधिक न्यायसंगत आरक्षण नीति बनाने की मांग की गई है। केंद्र ने कहा कि याचिकाओं में संविधान के तहत किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का जिक्र नहीं है। साथ ही, मौजूदा कानून में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि क्रीमी लेयर का नियम एससी-एसटी पर लागू होता है। सरकार के मुताबिक, यह अवधारणा सिर्फ ओबीसी और एसईबीसी आरक्षण से जुड़ी है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 11 अगस्त को रमाशंकर प्रजापति और अन्य की जनहित याचिकाओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था। याचिका में कहा गया है कि अगर किसी एससी-एसटी परिवार का सदस्य पहले ही संवैधानिक या वरिष्ठ सरकारी पद हासिल कर चुका है, तो उसके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इससे आरक्षण का फायदा आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक ज्यादा समान रूप से पहुंच सकेगा। याचिकाकर्ताओं ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उप-श्रेणी (सब-कैटेगरी) बनाकर उन्हें प्रवेश और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की भी मांग की है।
सिर्फ संसद को सूची में बदलाव का अधिकार
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कहा कि एससी और एसटी की सूची में किसी भी तरह का बदलाव केवल संसद ही कर सकती है। संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत किसी जाति या जनजाति को सूची में शामिल करने या हटाने का अधिकार सिर्फ संसद के पास है। केंद्र ने यह भी कहा कि याचिका स्थापित कानून की अनदेखी करती है। सरकार ने इंदिरा साहनी (मंडल आयोग) मामले का हवाला देते हुए कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी की पहचान ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर होती है, सिर्फ आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं।
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