जर्मनी में धर्मशाला की ब्लैक टी की धूम, फ्रांस को भा रही उलोंग और स्मोक Tea

By: Aug 30th, 2026 7:35 pm

कांगड़ा चाय की खुशबू पहुंची अंतरराष्ट्रीय बाजार तक

91 हजार किलो उत्पादन में 78 हजार किलो कोलकाता भेजा

अक्तूबर में विदेशों में मांग संग कीमत बढऩे की उम्मीद

नरेन कुमार – धर्मशाला

हिमाचल के कांगड़ा जिले की पहचान बन चुकी कांगड़ा की चाय अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी खास पहचान बना रही है। धर्मशाला में तैयार होने वाली ब्लैक टी जहां जर्मनी के चाय प्रेमियों को खूब पसंद आ रही है, वहीं फ्रांस में उलोंग और स्मोक टी की मांग बनी हुई है। पहाड़ों की जलवायु और विशिष्ट स्वाद के कारण कांगड़ा चाय की अलग-अलग किस्में विदेशी बाजार में अपनी अलग जगह बना रही हैं। धर्मशाला चाय उद्योग में इस वर्ष अब तक करीब 91 हजार किलोग्राम चाय का उत्पादन हो चुका है। इसमें से करीब 78 हजार किलोग्राम चाय कोलकाता भेजी जा चुकी है, जबकि इसमें से 58 हजार किलोग्राम चाय की बिक्री भी हो चुकी है। इस वर्ष अब तक चाय के दाम पिछले वर्ष के लगभग समान स्तर पर बने हुए हैं। प्रबंधन को उम्मीद है कि अक्तूबर में बाजार व विदेशों में मांग बढऩे के साथ चाय की कीमतों में भी सुधार हो सकता है।

धर्मशाला चाय उद्योग के उत्पादन प्रबंधक सुजीत राय ने विशेष बातचीत में बताया कि यहां मुख्य रूप से ब्लैक ऑर्थोडॉक्स टी और ब्लैक टी का उत्पादन होता है। इसके अलावा ग्रीन टी और उलोंग टी भी तैयार की जाती है। उन्होंने बताया कि धर्मशाला की ब्लैक टी को जर्मनी में खासा पसंद किया जाता है। वहीं फ्रांस में उलोंग टी की मांग है। धर्मशाला में तैयार की जाने वाली स्मोक टी भी फ्रांस के बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही है। उन्होंने बताया कि कांगड़ा चाय का स्वाद और इसकी विशिष्ट सुगंध इसे दूसरी चाय से अलग बनाती है। यही वजह है कि अलग-अलग देशों में यहां की अलग-अलग किस्मों को पसंद किया जा रहा है। विदेशी बाजार में कांगड़ा चाय की मांग बढऩा स्थानीय चाय उद्योग के लिए भी सकारात्मक संकेत है। चाय उद्योग प्रबंधन के अनुसार आगामी माह में यदि मौसम ने साथ दिया तो इस वर्ष उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहने की संभावना है।

इस वर्ष करीब 1.50 लाख किलोग्राम चाय उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अगस्त में बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, लेकिन आगामी दिनों में मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही अक्तूबर में चाय के बेहतर दाम मिलने की भी उम्मीद है। कांगड़ा चाय के लिए यह बदलता बाजार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब इसकी पहचान केवल हिमाचल व देश की स्थानीय चाय के रूप में नहीं, बल्कि विशिष्ट स्वाद और सुगंध वाली चाय के तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बन रही है। जर्मनी में ब्लैक टी और फ्रांस में उलोंग व स्मोक टी की मांग कांगड़ा चाय की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत है।

छह वर्षों में उत्पादन का उतार-चढ़ाव

वर्ष 2020 में कांगड़ा चाय उद्योग में 1,69,021 किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2021 में यह घटकर 1,37,900 किलोग्राम, 2022 में 1,45,682 किलोग्राम, 2023 में 1,65,013 किलोग्राम और 2024 में 1,38,017 किलोग्राम रहा। वर्ष 2025 में करीब 1,37,000 किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था। इस वर्ष मौसम ने साथ दिया तो उत्पादन करीब 1,50,000 किलोग्राम तक पहुंचने का अनुमान है।


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