हिमाचल की घेपन घाट झील बढ़ा रही खतरा, 33 साल में 178 फीसदी बढ़ा क्षेत्रफल

By: Aug 30th, 2026 4:43 pm

कार्यालय संवाददाता-शिमला

नेपाल में आई भीषण त्रासदी ने हिमालय की ऊंची चोटियों पर बनी ग्लेशियर झीलों के खतरे को फिर सामने ला दिया है। हिमाचल प्रदेश में जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की घेपन घाट ग्लेशियर झील इस चिंता का प्रमुख केंद्र है। सैटेलाइट अध्ययन के अनुसार वर्ष 1989 में 36.49 हेक्टेयर में फैली यह झील 2022 में बढकऱ 101.30 हेक्टेयर हो गई। यानी 33 वर्षों में इसका क्षेत्रफल करीब 178 फीसदी बढ़ा है और झील लगभग तीन गुना बड़ी हो गई है। यह झील करीब 4,068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी लंबाई 2.464 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई करीब 625 मीटर है। झील में करीब 35.08 मिलियन घन मीटर पानी होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और बदलते मौसम के बीच झील का बढ़ता आकार चिंता का विषय है।

घेपन घाट झील को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसके संभावित टूटने से पैदा होने वाली ग्लेशियर लेक आउटबस्र्ट फ्लड की है। राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के जोखिम आकलन में झील से निकलने वाली बाढ़ के अलग-अलग संभावित परिदृश्यों का अध्ययन किया गया है। आकलन के अनुसार सिस्सू सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में है और सबसे खराब स्थिति में झील टूटने के करीब 21 मिनट में बाढ़ की लहर सिस्सू पहुंच सकती है। पानी की गति करीब 43 किलोमीटर प्रति घंटे और बाढ़ की गहराई 20 मीटर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। पानी के साथ चट्टान, बड़े पत्थर, बर्फ और मलबा आने से नुकसान बढ़ सकता है। अध्ययन के अनुसार संभावित बाढ़ से 34 बस्तियां, करीब 204 हेक्टेयर कृषि भूमि, 57 पुल और करीब 106 किलोमीटर सडक़ प्रभावित हो सकती है। इसका असर चिनाब नदी के रास्ते हिमाचल से आगे जम्मू-कश्मीर तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।

वैज्ञानिक आकलन के जरिए की जा रही निगरानी

हिमाचल प्रदेश में संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी सैटेलाइट तस्वीरों, रिमोट सेंसिंग और वैज्ञानिक आकलन के जरिये की जा रही है। घेपन घाट झील के लिए संभावित बाढ़ के प्रभाव वाले क्षेत्रों के नक्शे भी तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने ग्लेशियर झीलों के जोखिम को कम करने के लिए निगरानी और शुरुआती चेतावनी व्यवस्था पर काम शुरू किया है। घेपन झील पर अभी पूर्ण अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित नहीं है। हालांकि सी-डैक की ओर से विकसित एक पायलट चेतावनी प्रणाली सिस्सू की कृत्रिम झील के पास परीक्षण के चरण में है। इसमें तापमान, हवा, दबाव और बारिश जैसी स्थितियों की निगरानी के साथ कैमरे और सैटेलाइट आधारित चेतावनी व्यवस्था का परीक्षण किया जा रहा है।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App