जलप्रलय के बाद कीचड़ में धंसी जिंदगी, मदद को उतरी फौज, अपनों की तलाश और नए ठिकाने ढूंढने में लगे लोग
आपदा के बाद रेस्क्यू आपरेशन जारी, अपनों की तलाश और नए ठिकाने ढूंढने में लगे लोग
नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने हर ओर तबाही मचाई है। जहां तक नजरें जा रही हैं, वहां तक सिर्फ कीचड़, टूटे घर, बिखरा सामान और हर तरफ मलबा नजर आ रहा है। बाढ़ से कुछ देर पहले तक जो लोग अपनी सामान्य जिंदगी जी रहे थे, इस आपदा के बाद वे नए ठिकाने ढूंढने, अपनों की तलाश करने और अपने टूटे हुए सपनों के बीच खुद को मजबूत करने का संघर्ष कर रहे हैं। नेपाल में आई तबाही ने चंद मिनटों में सब खत्म कर दिया। जितने देर में लोग कुछ सोच पाते और कर पाते उतनी देर में सब तबाह हो गया। इस मुश्किल घड़ी में रेस्क्यू टीम और सेना के जवान लगातार बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। जवानों का जज्बा और मेहनत दिखाने वाले कुछ वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर हर किसी का दिल भर आ रहा है। राहतकर्मी हेलमेट और लाइफ जैकेट पहनकर गहरे कीचड़ और मलबे के बीच फंसे लोगों को बाहर निकालने में लगे हुए हैं। रास्ते इतने खराब हो चुके हैं कि हर कदम पर फिसलने का खतरा बना हुआ है, फिर भी जवान बिना रुके अपने काम में जुटे हैं।
कई जगहों पर देखा गया कि जवान बुजुर्गों को अपने कंधों पर उठाकर उफनते पानी और कीचड़ भरी ढलान से पार करते हुए सुरक्षित स्थान तक पहुंचा रहे हैं। यह नजारा देखकर साफ पता चलता है कि आपदा के इस मुश्किल समय में सुरक्षा बल अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की मदद में लगे हैं। पुलिस और स्थानीय राहतकर्मी भी सेना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। बाढ़ और लैंडस्लाइड ने नेपाल के कई इलाकों में सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त कर दिया है। कई परिवार अपने घरों से बेघर हो गए हैं और राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। ऐसे कठिन हालात में भी सेना के जवानों की मेहनत, धैर्य और इनसानियत साफ नजर आ रही है। बचाव में जुटी टीमों के पास सीमित संसाधन हैं, फिर भी वे रस्सियों और हाथों के सहारे कीचड़ में फंसे लोगों तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है, ताकि किसी की जान को खतरा न रहे।
20 अरब जुटाएगा नेपाल, विश्व बैंक से मांगेगा मदद
नेपाल सरकार ने भीषण बाढ़ से हुए नुकसान से निपटने के लिए तुरंत 20 अरब नेपाली रुपए (1,250 करोड़) जुटाने का फैसला किया है। यह रकम प्रधानमंत्री राहत कोष, गृह मंत्रालय और दूसरे स्रोतों से जरूरत के मुताबिक उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा सरकार विश्व बैंक से करीब 25 अरब नेपाली रुपए (1,562.5 करोड़) की मदद लेने की तैयारी कर रही है।
133 से ज्यादा जलविद्युत कर्मी लापता
रसुवा में आई बाढ़ के बाद अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 133 से ज्यादा कर्मचारी और श्रमिक लापता हैं। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के मुताबिक, इनमें विदेशी कर्मचारी भी शामिल हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाल विद्युत प्राधिकरण की टीमें प्रभावित इलाके में पहुंच गई हैं। स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और स्वास्थ्य संस्थानों की मदद से सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
पीडि़तों के लिए पांच लाख डॉलर की मदद देगा अमरीका
अमरीका रसुवा में बाढ़ से प्रभावित लोगों और समुदायों की मदद के लिए पांच लाख डॉलर की सहायता देगा। अमरीकी विदेश विभाग ने कहा है कि राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए प्रभावित इलाके में एक आपदा सलाहकार भी भेजा जाएगा। काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह प्रभावित इलाके में मौजूद अमरीकी नागरिकों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें जरूरी मदद पहुंचाने के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है।
पानी में कूदकर बहता सामान निकाल रहे लोग
नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें नेपाल के स्थानीय लोग नदी में तैरते मलबे से सिलेंडर और लकड़ी जैसी चीजें निकालने के लिए दौड़ रहे हैं। कई लोग बहते पानी में उतरकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। वहीं नेपाल में बाढ़ में बहकर आए एक शव के कान से बाली निकालने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को आगे की पूछताछ और जांच के लिए जिला पुलिस कार्यालय, चितवन भेजा है।
शव मिलने का सिलसिला जारी, रखने की जगह कम
नेपाल में रसुवा की बाढ़ के बाद 359 शव बरामद हो चुके हैं, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित रखने की चुनौती है। चितवन की स्वास्थ्य सुविधाओं में करीब 50 शव रखने की क्षमता ही बताई गई है। एक्सपट्र्स के मुताबिक, बड़े रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों में अस्थायी शवगृह बनाए जा सकते हैं। हर शव का नंबर, फोटो और पहचान से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड करना जरूरी है। खराब हालत वाले शवों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट, दांतों की जांच और डीएनए टेस्ट किए जा सकते हैं। एक्सपट्र्स ने कहा है कि पहचान पक्की होने से पहले शव परिवार को न सौंपे जाएं।
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