जसवां-प्रागपुर में CM की बड़ी घोषणाएं, डाडासीबा में SDM कार्यालय, कस्बा कोटला में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

By: Aug 29th, 2026 4:37 pm

जसवां-प्रागपुर। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज कांगड़ा जिले के जसवां-प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र के डाडासीबा में नया उप-मंडलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नए कार्यालय से संबंधित अधिसूचना शीघ्र जारी कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए कस्बा कोटला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को चौबीसों घंटे संचालित करने के लिए आवश्यक प्रावधान करने की भी घोषणा की।

सीएम सुक्खू ने आज डाडासीबा में मुख्यमंत्री मत्स्य सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 1,012 मछुआरा परिवारों को वित्तीय सहायता जारी करने के उपरान्त एक विशाल जन समूह को संबोधित करते हुए ये घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री मत्स्य सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 3,500 रुपए की राशि सीधे हस्तांतरित की गई।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मछली पकड़ने पर लगाए जाने वाले वार्षिक प्रतिबंध की अवधि के दौरान प्रत्येक मछुआरा परिवार को 3,500 रुपए की वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। मछुआरा समुदाय की समस्याओं और कठिनाइयों को समझने के उपरान्त ही इस समुदाय की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व किसी भी सरकार ने मछुआरा परिवारों के कल्याण के बारे में नहीं सोचा। शासन में वास्तविक बदलाव का अर्थ यही है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को राज्य के संसाधनों पर समान अधिकार मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से मछुआरा परिवार सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जी सकेंगे। इसके अलावा, राज्य सरकार ने मछली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य भी प्रदान किया है। यदि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद नहीं किया गया होता तो हिमाचल प्रदेश वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर बन सकता था। इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश को वर्ष 1952 से आरडीजी मिल रही थी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इसे बंद किए जाने के कारण राज्य को प्रति वर्ष लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान हो रहा है।

सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस वर्ष 2 अक्तूबर को सोलन जिले से मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार योजना शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे लगभग 90,000 परिवारों की पहचान की गई है, जिन्हें अब तक किसी भी सरकारी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। इस योजना के अंतर्गत लगभग दो लाख परिवारों को सहायता प्रदान की जाएगी। इन परिवारों की महिलाओं को 1,500 रुपए प्रतिमाह पेंशन के साथ 300 यूनिट मुफ्त बिजली भी उपलब्ध करवाई जाएगी।

वर्ष 2023 की विनाशकारी आपदा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौरान लगभग 23,000 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए और 900 से अधिक लोगों की जान गई। राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों को नया घर बनाने के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 1.50 लाख रुपए से बढ़ाकर 7 लाख रुपए किया और अब इसे बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की मंशा स्पष्ट है और सरकार पूरी ईमानदारी एवं प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार ने भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद करने का काम किया है और जनता के कल्याण के लिए नीतियां तैयार की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। सोलन जिले के बद्दी क्षेत्र में करीब 5,000 बीघा जमीन भाजपा के करीबी उद्योगपतियों को कस्टमाइज्ड पैकेज के अंतर्गत बिना पंजीकरण के आवंटित की गई। राज्य सरकार इन जमीन आवंटनों को रद्द करने पर विचार कर रही है। यदि आवंटित जमीन पर कोई कार्य शुरू नहीं किया गया है, तो उसका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।

पिछली भाजपा सरकार के दौरान लागू हिमकेयर योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरुषों के अंडाशय के ऑपरेशन के बिल तैयार किए गए, जो एक बड़े घोटाले की ओर संकेत करता है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के दौरान बेनामी लेन-देन भी हुआ। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं और यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित जमीन को जब्त कर गरीबों में वितरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की लड़ाई में सहयोग देने का आह्वान किया।

सीएम सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार विद्यार्थियों को उनके घर के निकट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए शिक्षा क्षेत्र में कई सुधार कर रही है। प्रदेश में 156 से अधिक सीबीएसई स्कूल खोले गए हैं। इसके अलावा, स्कूलों में शिक्षकों के 6,000 नए पद भरे गए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में केवल 35 प्रतिशत स्टाफ उपलब्ध था। वर्तमान राज्य सरकार ने 31 दिसंबर, 2026 तक प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 90 प्रतिशत चिकित्सा, पैरामेडिकल और अन्य सहायक स्टाफ की तैनाती का लक्ष्य रखा है, ताकि लोगों को प्रदेश के भीतर ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने जसवां-परागपुर क्षेत्र के बाड़ी में 95 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कई अन्य विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इनमें 1.80 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, डाडासीबा के विज्ञान खंड की आधारशिला भी शामिल हैं। इसके अलावा, जसवां-परागपुर क्षेत्र में 4.85 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न सड़क कार्यों तथा 37 लाख रुपए की लागत से अलोह में स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन के निर्माण की आधारशिला भी रखी गई।

राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय देश के कई हिस्सों की तुलना में बेहतर है। हालांकि, प्रदेश के निचले क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से कम प्रति व्यक्ति आय को देखते हुए राज्य सरकार ने पहली बार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश में संतुलित विकास सुनिश्चित कर रहे हैं और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

विधायक संजय रतन ने कहा कि राज्य सरकार विकास के नए मानदंड स्थापित कर रही है। पहली बार किसी सरकार ने मछली पालकों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि पूरे हिमाचल प्रदेश में संतुलित विकास हो रहा है और पहली बार प्रदेश के निचले क्षेत्र से संबंध रखने वाला कांग्रेस का मुख्यमंत्री राज्य का नेतृत्व कर रहा हैं। मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए पूरी दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता सुरेंद्र मनकोटिया ने कहा कि इससे पहले किसी भी सरकार ने मछली पालकों को पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिनमें से अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की यह नई और अनूठी पहल है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए कानून बनाया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एमएसपी शुरू किया। राज्य सरकार ने हल्दी के लिए 150 रुपए प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक एमएसपी घोषित किया है।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App