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जनता को झटके पर झटका, त्योहारों से पहले फूटा महंगाई का बम, गैस के बाद प्याज-चीनी ने बढ़ाई चिंता

By: Aug 22nd, 2026 9:07 pm

क्या इस साल 100 के पार जाएंगे चीनी- प्याज के दाम

त्योहारी सीजन से पहले महंगाई की मार
चंद ही दिनों में 30 % से ज्यादा बढ़े दाम
डिमांड- सप्लाई में गैप से बढ़ी मुसीबत

साल 2026 आधे से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन इस साल जनता को अब तक एक के बाद ऐसे झटके लगे हैं कि लोग सोच रहे हैं आखिरी चार महीनों में जेब पर कितना भार पड़ने वाला है। आमदनी तो बढ़ी नहीं, लेकिन पहले ईरान इजरायल युद्ध और होर्मुज पर तनाव के चलते LPG गैस के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई। पेट्रोल- डीजल भी महंगा हुआ और अभी जनता इस सब से थोड़ा संभलने की कोशिश कर ही रही थी कि जनता पर महंगाई का एक और बम फूट गया। सोना-चांदी तो पहले ही पहुंच से बाहर हो चुका है और अब जब त्योहारों का सीजन दस्तक देने वाला है तो आम आदमी की रसोई का बजट भी बिगड़ता नजर आ रहा है। क्योकि पिछले चंद दिनों में जहां प्याज 25 से 30 फीसदी महंगा हो गया है। वहीं चीनी के बढ़ते दाम लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। यानी चूल्हे से लेकर थाली और चाय से लेकर मिठाई तक, महंगाई का असर आम परिवार की जेब पर दिखाई देने लगा है। खासकर ऐसे समय में जब त्योहारों के दौरान घरों में मिठाई, पकवान और खाने-पीने की चीजों की खपत बढ़ जाती है।

किसी ने सोचा तक नहीं होगा कि हर घर में रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी एक दिन 100 रु प्रति किलों के आंकड़े को छूने के लिए बेताब होगी, जो चीनी पहले चीनी 47-48 रुपये किलो मिल रही थी, अब परचून दुकानों में इसके दाम 65 से 70 रुपये तक पहुंच गए हैं। पिछले कुछ दिनों में ही चीनी के दाम 18 से 20 रु तक बढ़ गए हैं। इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि चीनी के दाम बस बढ़ते ही जा रहे हैं। गुड़ शक्कर सबके दाम बढ़ चुके हैं। कीमतों में तेजी के पीछे कम उत्पादन, मौसम का असर तो है ही, लेकिन एक कारण ये भी बताया जा रहा है कि गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले इथेनॉल की वजह से चीनी पर असर पड़ा है। हालांकि इस रिजन को सरकार ने पूरी तरह से गलत बताया है और सरकार यही कह रही है कि और त्योहारों से पहले बढ़ी मांग और उत्पादन में कमी महंगाई के कारण हैं।

य़ही नहीं चीनी ने तो आम जनता का स्वाद कड़वा कर ही दिया है। मगर प्याज की कीमतों भी रूला रही हैं।  प्याज हर भारतीय रसोई की जरूरत है। चंद ही दिनों में प्याज के दाम 30 से बढ़कर करीब 60 रुपये किलो होने से लोग परेशान हैं। प्याज को लेकर भी यही कहा जा रहा है कि इस बार देर से शुरू हुई बुआई के चलते खरीफ प्याज की नई फसलों की आवक देरी से हो रही है  और डिमांड काफी बढ़ गई है। जिस वजह से मांग और सप्लाई का अंतर गहरा गया है  और दाम आसमान छू रहे हैं।

हालांकि सोलन से दिव्य हिमाचल की टीम ने बाजार में आम लोगों और दूकानदारों से बात की और जानने की कोशिश की कि आखिर इस बढ़ती महंगाई पर आम लोग और व्यापारी क्या राय रखते हैं. आईए आपको भी सुनाते हैं

तो कुल मिलाकर बढ़ती महंगाई जनता को परेशान कर रही है. सरकार अब महंगाई को कंट्रोल करने के लिए कुछ कदम जरूर उठा रही है, चीनी की बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर तक ड्यूटी फ्री 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी आयात की मंजूरी दी है. जमाखोरी को रोकने के लिए स्‍टाक सीमा तय की जा रही है.. 1 सितंबर से चीनी का सिर्फ 15 दिन का स्टॉक ही रखा जा सकता है यहीं नहीं घरेलू उत्‍पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों से इस बार जल्‍द यानी 15 अक्‍टूबर से पेराई शुरू करने को कहा है. ताकि नई फसल आने के बाद त्‍योहारों तक पर्याप्‍ स्टाक उपलब्ध रहे..चीनी सिर्फ चाय में इस्तेमाल होने वाली चीज नहीं है। मिठाई, हलवा, खीर, बेकरी उत्पाद और घर में बनने वाले तमाम पकवानों में इसका इस्तेमाल होता है। दूसरी ओर प्याज के भाव को नियंत्रित करने के लिए सरकार पूरे बफर स्टॉक को रिटेल मार्केट में उतार सकती है। लेकिन सरकार से पास बफर स्टॉक भी इस बार कमजोर ही है, ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई कैसे कंट्रोल होगी कुछ कहा नहीं जा सकता। त्योहार से पहले जिस तरह से चीनी और प्याज के दाम बढ़े हैं इसका असर अभी से बाजारों में दिख रहा है. और आने वाले दिनों में अगर दाम कंट्रोल नहीं हुए तो चाय के कप से लेकर मिठाई तक सब महंगा हो सकता है, अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में सरकार के कदम आम आदमी की थाली और जेब को कितनी राहत दे पाते हैं या नहीं।


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