पांवटा-गुम्मा एनएच पीडब्ल्यूडी के हवाले
1352 करोड़ से बनी 103 किलोमीटर लंबी सडक़
दिव्य हिमाचल ब्यूरो- नाहन
सिरमौर जिला के पांवटा साहिब-गुम्मा नेशनल हाई-वे-707 का जिम्मा अब हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग का नेशनल हाई-वे विंग देखेगा। पांवटा साहिब से गुम्मा तक करीब 103 किलोमीटर सडक़ के डबललेन का निर्माण पूरा हो चुका है। अब मोर्थ ने पीडब्ल्यूडी के एनएच नाहन मंडल को पांवटा साहिब से गुम्मा तक 103 किलोमीटर सडक़ की जिम्मेदारी सौंप दी है। गौर हो कि प्रदेश के पहले ग्रीन कॉरिडोर के तहत करीब 1352 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा नेशनल हाई-वे-707 का 103 किलोमीटर हिस्सा अब लोक निर्माण विभाग के नेशनल हाई-वे नाहन मंडल के हवाले हो गया है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाई-वे (मोर्थ) ने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस राष्ट्रीय राजमार्ग को हाल ही में लोक निर्माण विभाग को सौंप दिया है। अब सडक़ के रखरखाव और आगामी मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी नैशनल हाई-वे नाहन मंडल की होगी। गौर हो कि पांवटा साहिब से सिरमौर शिमला सीमा पर स्थित फेडिज पुल तक इस ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण पांच अलग-अलग कंपनियों ने किया।
यह निर्माण कार्य 2023 के अंत तक पूरा किया जाना था, लेकिन मार्च, 2026 में ही यह पूरा हो पाया। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों के लिए पांच कंपनियों को करीब 10 से 30 किलोमीटर तक के अलग-अलग टेंडर आबंटित किए गए थे। शुरुआत में इस परियोजना की डीपीआर 1150 करोड़ की तैयार की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 1350 करोड़ किया गया। निर्माण कार्य पूरा होने के साथ मोर्थ ने हाल ही में पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा नेशनल हाई-वे को नेशनल हाई-वे नाहन मंडल को सौंप दिया है। अब इसकी देखरेख एनएच नाहन मंडल करेगा। एनएच नाहन मंडल के अधिशाषी अभियंता ईं. राकेश खंडूजा ने बताया कि एनएच नाहन मंडल अब पांवटा साहिब-गुम्मा एनएच की देखभाल करेगा।
एनजीटी में विचाराधीन है अनियमितताओं का मामला
शिलाई विधानसभा क्षेत्र के समाजसेवी नाथू राम चौहान ने निर्माण के दौरान पर्यावरण को हुए नुकसान और कथित अनियमितताओं का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली के समक्ष उठाया था। मामले में निर्माण कंपनियों और जिला प्रशासन को लेकर एनजीटी में सुनवाई हुई और कई मौकों पर संबंधित पक्षों को फटकार भी लगी। यह मामला अभी भी एनजीटी में विचाराधीन है। इस ग्रीन कॉरिडोर को लेकर सवाल भी खड़े होते रहे हैं। निर्माण के दौरान अवैज्ञानिक कटिंग, कथित अवैध खनन, पर्यावरण को नुकसान, सडक़ की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर डीपीआर के मुताबिक पहाड़ की कटिंग और सडक़ की चौड़ाई नहीं की गई है।
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