पीएम आवास योजना की राशि 3.63 लाख करने का प्रस्ताव, बिक्रम ठाकुर लाए प्रस्ताव, पक्ष-विपक्ष एकजुट

By: Aug 28th, 2026 12:07 am

कार्यालय संवाददाता — शिमला

हिमाचल के हितों की लड़ाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष सदन में हल्की नोकझोंक के बाद एकजुट हो गया हैं। हिमाचल प्रदेश में आवास निर्माण में बढ़ते खर्च को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली आवास राशि बढ़ाने का गैर-सरकारी संकल्प विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने संशोधित रूप में ध्वनिमत से पारित कर दिया। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने संकल्प को आवश्यक बताते हुए कहा कि वर्तमान में केंद्र से मिलने वाली 1.30 लाख रुपए की राशि पर्वतीय क्षेत्रों में घर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र सरकार से 1.30 लाख रुपये मिलते हैं, जिसमें राज्य सरकार भी 10 प्रतिशत का योगदान देती है।

लाभार्थी को निर्माण के लिए तीन किस्तों में राशि उपलब्ध करवाई जाती है। मंत्री ने माना कि मौजूदा राशि पर्याप्त नहीं है। इससे पहले संकल्प प्रस्तुत करते हुए विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में पात्र परिवारों को केंद्र से 1.30 लाख और प्रदेश सरकार की ओर से 20 हजार रुपए मिलते हैं। उन्होंने आवास सहायता को बढ़ाकर तीन लाख रुपए करने की मांग रखी। इसके बाद सदन ने सिफारिश पारित की कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पात्र लाभार्थियों को मिलने वाली आवास राशि 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.63 लाख रुपए की जाए। दुर्गम क्षेत्रों के लिए और अधिक राशि निर्धारित करने की सिफारिश की गई।

आपदा से राहत के लिए दिए सात लाख

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रदेश सरकार ने प्रभावित परिवारों को मकान निर्माण के लिए सात लाख रुपए तक की सहायता दी थी। उन्होंने बताया कि पक्के आवास निर्माण के लिए 3.63 लाख रुपए प्रति इकाई का प्रस्ताव 15 फरवरी, 2026 को केंद्र सरकार को भेजा गया था। 12 अगस्त को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली और राशि को 1.30 लाख रुपए ही रखा गया। मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार एक बार फिर सदन की भावना के अनुरूप संशोधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजेगी।

जिनकी जमीनें गईं, उनके साथ हो न्याय

डा. जनकराज द्वारा विधानसभा के मानसून सत्र में लाए गए प्रस्ताव पर सुरेंद्र शौरी ने कहा कि जो भी हाइड्रोप्रोजेक्ट उनके विधानसभा में लगे हैं इनका प्रोपर आकलन किया जाए। बरसात के दो से तीन महीने सैंज घाटी के लोगों को दहशत में काटने पड़ते हैं। रोजगार के वादे 606 लोगों की सूची बनी केवल 33 लोगों केा रोजगार दिया। कमिटमेंट की है, एग्रीमेंट किया है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। कहते हैं वैकेंसी होगी, तब रोजगार देंगे। क्षेत्र में उठाऊ जल परियोजनाएं चली हैंं, लेकिन जो लोग लैंडलैस हुए हैं, उनके साथ न्याय होना चाहिए।

आनी के लोगों को नहीं मिल रहा उचित मुआवजा

डा. जनकराज के प्रस्ताव लोकेंद्र कुमार ने कहा कि आनी विधानसभा क्षेत्र में लुहरी प्रोजेक्ट का काम चल रहा है, लेकिन जितना मुआवजा मिलना चाहिए, वह नहीं मिल रहा है। आए दिन क्षेत्र में धरना प्रदर्शन चले रहते हैं। नित्थर में आनस, झली, दुराह क्षेत्र भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रोजेक्ट के लोग आनाकानी कर मीटिंग को टाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आनी विधानसभा को जो बेनिफिट मिलने चाहिए वो नहीं मिल रहे। अधिकारी दोहरे मामदंड चला रहे हैं। उन्होंने आरोप लगया कि रामपुर और लुहरी प्रोजेक्ट केे अंदर मनमानी की जा रही है। स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा, जबकि बाहर से लोगों को लोकर प्रोजेक्ट में रखा जा रहा है।

बिलासपुर के लोगों को सबसे ज्यादा हुआ नुकसान

त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भाखडा बांध के बनने के बाद 1971 में भाखड़ा डैम ग्रांट ऑफ लैंड स्कीम लांच हुई। इस स्कीम के तहत जिनकों जमीन मिलनी चाहिए थी, उन्हें नहीं मिली। जिन्होंने देश को जगमगाया, वे आज अंधेरे में हैं। जब पानी नीचे जाता है, लोग जमीन का उपयोग करते थे, लेकिन अब बीबीएमबी वाले 20 से 30 फुट ऊपर आ गए। वे एक्चुअल जमीन पर भी बाउंड्री लगाकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि सिल्ट भी लोगों की जमीनों में समस्या का कारण बन रही है।


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