प्याज की बढ़ती कीमत, महंगाई का एक और झटका
अगर देश में कोई भी खाने की चीज, वो भी गरीब से गरीब के लिए भी रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली हो, महंगी हो जाए तो सरकारों को उसकी कीमत कम करने के उपाय प्राथमिक आधार पर करने चाहिए। विकास के वादे और दावे तब तक खोखले माने जा सकते हैं, जब तक देश में पैदा होने वाली चीजें महंगी हों। अब तो सरकारों को प्याज की बढ़ती कीमतों के लिए कुंभकर्णी नींद से जाग जाना चाहिए, क्योंकि अब देश के कुछ राज्यों में इसकी कीमत 50 रुपए प्रति किलो से ऊपर हो चुकी है। वैसे प्याज की कीमतें इससे पहले भी बढ़ती थी और इस पर खूब राजनीति भी होती आई है।
प्याज पर ही नहीं, बल्कि हर तरह की महंगाई को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़े जाते हैं। लेकिन महंगाई के समाधान के लिए किसी भी राजनीतिक पार्टी की सरकार ने आज तक गंभीरता नहीं दिखाई।
-राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा
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