सोलन को मिला ताज
राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण में हिमाचल के जिला सोलन का देश के टॉप पांच जिलों में शरीक होना एक उपलब्धि है और यह संकेत भी कि प्रदेश की आर्थिकी कैसे आगे बढ़ सकती है। चंडीगढ़ से समीपता के कारण सोलन जिला ने बहुआयामी तरक्की की है, खास तौर पर बीबीएन क्षेत्र का औद्योगिक विकास उल्लेखनीय तरक्की का कारण बना है। सोलन कैश क्रॉप के अलावा पर्यटन और खास तौर पर हाई वे टूरिज्म में अव्वल साबित हुआ है। जाहिर तौर पर शिक्षा के हब बनते सोलन ने मानव संसाधन विकास में श्रेष्ठता व दक्षता हासिल की है, जबकि स्वरोजगार व व्यापार की दृष्टि में जिला ने शहरी विकास का महत्त्व रेखांकित किया है। जिला में प्रति व्यक्ति आय 8.10 लाख रुपए आंकी गई है जो राष्ट्रीय औसत से कहीं आगे है। आर्थिक कत्र्तव्य पथ पर खड़े सोलन ने अपनी उपलब्धियों से पूरे प्रदेश को भी सींचा है, क्योंकि रोजगार के लिहाज से बीबीएन में करीब चार लाख लोगों को अवसर मिल रहे हैं। ऐसे में जबकि सोलन जिला के माध्यम से हिमाचल के आर्थिक संबोधन तय हो रहे हैं, यह जरूरी है कि हम विकास के इस पथ को और चौड़ा करें। हम पहले भी कहते रहे हैं और अब पुन: दोहरा देते हैं कि बीबीएन को प्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में दर्जा व महत्त्व मिलना चाहिए। इसके लिए वित्तीय संस्थाओं के मुख्यालय यहां शिफ्ट होने चाहिएं तथा औद्योगिक संगठन व कार्यालयों का संचालन भी यहीं से होना चाहिए। सोलन जिला ने आर्थिक मुकुट पहनकर प्रदेश के बाकी जिलों को भी तरक्की, विकास और आगे बढऩे का आगाज सौंपा है।
प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों पर औद्योगिक गलियारा विकसित किया जाए, तो बाकी जिला भी आर्थिक नक्शे पर खुशहाल होंगे। कभी पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वाई एस परमार ने काला अंब, परवाणू, नालागढ़, मैहतपुर से संसारपुर टैरस तक एक औद्योगिक पट्टी विकसित की थी। आज इसकी रूपरेखा बढ़ाते हुए सारे सीमांत क्षेत्र को औद्योगिक गलियारा बना देना चाहिए। इसी तरह हिमाचल के मध्यम भाग में शिक्षा के हब, कृषि-बागबानी तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्यटन को तवज्जो दें, तो आर्थिक ढांचा और सुदृढ़ होगा। प्रदेश की ग्रामीण आर्थिकी को संबल देने के लिए जैव खेती का प्रचलन कारगर साबित हुआ है, जबकि वर्तमान सुक्खू सरकार ने मक्की व हल्दी के समर्थन मूल्य बढ़ा कर किसान की आय को प्रोत्साहित किया। इसी तरह दुग्ध उत्पादन की खरीद दरें बढ़ा कर सरकार ने डेयरी क्षेत्र को आशाजनक बना दिया है। सारे हिमाचल को सोलन की तर्ज पर समृद्ध बनाने की चुनौती पर कनेक्टिविटी से काफी मदद मिलेगी। फोरलेन परियोजनाओं के अलावा कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार योजना से क्षेत्रीय आर्थिकी का विस्तार होगा। कांगड़ा को टूरिज्म कैपिटल बनाने के सारे उद्देश्य पूरे हो जाएं, तो निश्चित रूप से जिला में प्रति व्यक्ति आय का विस्तार होगा। प्रदेश में रोजगार के साधन बढ़ाने के हर प्रयास से प्रति व्यक्ति आय में विस्तार होगा। प्रदेश में उद्योगों के अलावा अगर आईटी पार्क, ट्रांसपोर्ट नगर तथा फिल्म सिटी जैसी परियोजनाओं पर काम करें तो निश्चित रूप से जीडीपी में बढ़ोतरी के साथ-साथ प्रति व्यक्ति आय व व्यय में भी वृद्धि होगी।
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