मछुआरों के लिए सुक्खू सरकार का बड़ा ऐलान, नाव पर 70% और फिशिंग गियर पर 90% सब्सिडी
शिमला। प्रदेश सरकार ने मछुआरों की आजीविका में सुधार के लिए अनेक कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मछली पकड़ने वाली नावों और उपकरणों के लिए व्यापक अनुदान योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र की गतिविधियों को बढ़ावा और प्रदेश में मत्स्य पालन अवसंरचना को सुदृढ़ करना है। सरकार की फिशिंग बोट सब्सिडी योजना के तहत पात्र जलाशय मछुआरों को मछली पकड़ने के लिए नाव खरीदने हेतु 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रत्येक नाव की लागत 50,000 रुपए निर्धारित की गई है, जिसमें से 70 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 30 प्रतिशत राशि लाभार्थी द्वारा वहन की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य गोबिंद सागर, पोंग डैम, चमेरा, रणजीत सागर और कोल डैम सहित प्रमुख जलाशयों में मछली पकड़ने वाली नौकाओं के बेड़े का आधुनिकीकरण करना है, जिससे मछुआरों की सुरक्षा, कार्यकुशलता और आय के अवसरों में सुधार हो सके। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को किसी पंजीकृत प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति का सक्रिय सदस्य होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वित्तीय वर्ष के दौरान कम से कम 50 दिन मछली पकड़ने का कार्य किया हो।
राज्य सरकार ने मछुआरा समुदाय को लाभान्वित करने के उद्देश्य से सब्सिडाइज्ड फिशिंग गियर योजना भी शुरू की है, जिसके अंतर्गत कास्ट नेट और गिल नेट पर 90 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। योजना के तहत नदी क्षेत्रों के मछुआरों को 3,000 रुपए की लागत वाले कास्ट नेट के लिए केवल 300 रुपए खर्च करने होंगे, जबकि शेष 2,700 रुपए की राशि राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करेगी। इसी प्रकार, जलाशय मछुआरों को 5,000 रुपए की लागत वाला गिल नेट केवल 500 रुपए में मिलेगा और 4,500 रुपए की राशि राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में प्रदान की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य मछली पकड़ने के उपकरणों को किफायती बनाना तथा मछली पकड़ने की गतिविधियों को बढ़ावा देना है। योजना के तहत नदी क्षेत्र के 4,000 सक्रिय मछुआरों को कास्ट नेट और जलाशय के 3,000 सक्रिय मछुआरों को गिल नेट सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी। इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र लाभार्थियों के पास मत्स्य विभाग द्वारा जारी तीन वर्षों से वैध मछली पकड़ने का लाइसेंस होना चाहिए।
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन में अपार संभावनाएं विद्यमान हैं और राज्य सरकार इस क्षेत्र को आजीविका और रोजगार के एक स्थाई साधन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन योजनाओं से मछुआरों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता मिलेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार हिमाचल प्रदेश में ‘ब्लू इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करने के दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से न केवल मछुआरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि राज्य में मछली उत्पादन, मूल्य संवर्धन और आय सृजन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also, Download our Android App or iOS App
