सुप्रीम कोर्ट का फैसला, दोषी को फांसी से ही मिलेगी मौत की सजा, कम दर्दनाक विकल्प वाली याचिका खारिज

By: Aug 19th, 2026 12:07 am

कम दर्दनाक विकल्प वाली याचिका खारिज, भविष्य के लिए रास्ते बंद नहीं

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा दिए जाने के लिए फांसी की जगह कम दर्दनाक और अधिक मानवीय तरीकों जैसे लीथल इंजेक्शन को अपनाने की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस मुद्दे पर पुनर्विचार का रास्ता खुला रहेगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने साफ किया कि फिलहाल देश में फांसी के जरिए ही मृत्युदंड देने की व्यवस्था संवैधानिक रूप से वैध और प्रभावी रहेगी। सर्वोच्च अदालत ने इस मामले से जुड़े तीन पुराने फैसलों (दीना बनाम भारत संघ) को बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग को भी यह कहते हुए ठुकरा दिया कि इसके लिए कोई ठोस आधार नहीं है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 354(5) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाया। यह धारा फांसी की प्रक्रिया से मृत्युदंड को निष्पादित करने का प्रावधान करती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा की इस याचिका में फांसी के स्थान पर जहरीले इंजेक्शन, गोली मारने, बिजली के झटके देने या गैस चैंबर जैसे तरीकों को अपनाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि फांसी की प्रक्रिया से अत्यधिक दर्द और लंबे समय तक पीड़ा होती है। अदालत ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया कि उसका यह निर्णय भविष्य के वैज्ञानिक और मेडिकल अध्ययनों के रास्ते बंद नहीं करता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका को खारिज करने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में अगर कोई ठोस वैज्ञानिक, मेडिकल या व्यावहारिक साक्ष्य सामने आते हैं, तो इस विषय की संवैधानिक समीक्षा नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार अगर चाहे तो कानून, फॉरेंसिक मेडिसिन और न्यूरोसाइंस के विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर फांसी के विकल्प और दूसरे तरीकों के प्रभाव पर विस्तृत समीक्षा कर सकती है।


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