वेंटिलेटर पर बहन ने भाई की कलार्ई पर राखी बांध निभाई रिश्ते की पक्की डोर
फरीदाबाद के अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही बहन; त्योहार पर खासतौर पर मिलने पहुंचा नंगल जरियाला का दीपक, सभी की आंखें हुईं नम
स्टाफ रिपोर्टर-दौलतपुर चौक
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने के संकल्प का पर्व है, लेकिन फरीदाबाद के मरेंगो एशिया अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही स्वागत और उनके भाई दीपक जरियाल, निवासी नंगल जरियाला, के लिए इस बार का रक्षाबंधन भावनाओं से भरा ऐसा पल बन गया, जिसे शायद दोनों कभी भुला नहीं पाएंगे। करीब एक माह से आईसीयू और पिछले लगभग 20 दिनों से वेंटिलेटर के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रही अपनी बड़ी बहन से राखी बंधवाने के लिए दीपक विशेष रूप से अस्पताल पहुंचे। दो दिन पहले जब दीपक अपनी बहन से मिलने अस्पताल पहुंचे तो स्वागत ने बोल पाने में असमर्थ होने के बावजूद इशारों में भाई से तुरंत राखी बंधवाने की इच्छा जताई। दीपक ने उन्हें समझाया कि रक्षाबंधन तो दो दिन बाद है और वह उस दिन भी उनके पास आएंगे। लेकिन बहन ने इशारों में मानो जिंदगी की सच्चाई को महसूस करते हुए कहा कि अभी राखी बांधनी है… दो दिन बाद का पता नहीं। बहन के इन शब्दों ने भाई का दिल भीतर तक हिला दिया। दीपक ने उसी समय अपनी कलाई आगे कर दी और बहन ने अस्पताल के बिस्तर पर रहते हुए अपने भाई की कलाई पर राखी बांध दी। वह पल भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और जिंदगी की अनिश्चितता को एक साथ बयां कर गया। वहीं, आज रक्षाबंधन के पावन अवसर पर दीपक एक बार फिर अपनी बहन के पास पहुंचे और उससे राखी बंधवाई।
वेंटिलेटर और मिनी वेंटिलेटर के सहारे सांसों को थामे जिंदगी की जंग लड़ रही स्वागत के चेहरे पर भाई को देखकर आई हल्की-सी खुशी ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। कमजोर शरीर, मशीनों के सहारे चलती सांसें और आंखों में अपनों को देखकर झलकता अपनापन—इस दृश्य को शब्दों में बयां करना मुश्किल था। दीपक ने बताया कि करीब 15 दिन पहले जब वह आईसीयू में अपनी बहन से मिलने गए थे, तब उन्होंने स्वागत से कहा था कि आप जल्दी ठीक हो जाओ, इस बार रक्षाबंधन पर मैं खुद आपके पास आकर राखी बंधवाऊंगा। उस समय बहन ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाकर मानो भाई को भरोसा दिलाया था कि वह उसका इंतजार करेगी और राखी जरूर बांधेगी। शायद इसी विश्वास ने दीपक को आज अस्पताल तक खींच लाया। परिवार में कुछ दिन पहले ही भाभी जी के निधन के कारण इस बार रक्षाबंधन का पर्व न मनाने का निर्णय लिया गया था। घर में पहले ही मातम का माहौल था, लेकिन बहन से किया वादा दीपक के लिए सबसे ऊपर था। इसलिए उन्होंने पर्व की खुशियों से अधिक बहन के पास रहकर उसके साथ इस रिश्ते की डोर को मजबूत करना जरूरी समझा। दीपक ने भावुक होते हुए कहा कि आज बहन से राखी बंधवाते समय मन में कोई और इच्छा नहीं थी, बस भगवान से यही प्रार्थना थी कि उनकी बहन जल्द स्वस्थ होकर घर लौटे। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी बहन इस जिंदगी की जंग
जरूर जीतेगी।
हाथों में ताकत नहीं, दिल में रिश्ते की पक्की डोर
बहन ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाकर मानो भाई को भरोसा दिलाया था कि वह उसका इंतजार करेगी और राखी जरूर बांधेगी। शायद इसी विश्वास ने दीपक को आज अस्पताल तक खींच लाया। परिवार में कुछ दिन पहले ही भाभी जी के निधन के कारण इस बार रक्षाबंधन का पर्व न मनाने का निर्णय लिया गया था। घर में पहले ही मातम का माहौल था, लेकिन बहन से किया वादा दीपक के लिए सबसे ऊपर था।
स्वस्थ होकर लौटेगी बहन तो दिल से करूंगा स्वागत
दीपक ने भावुक होते हुए कहा कि आज बहन से राखी बंधवाते समय मन में कोई और इच्छा नहीं थी, बस भगवान से यही प्रार्थना थी कि उनकी बहन जल्द स्वस्थ होकर घर लौटे। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी बहन इस जिंदगी की जंग जरूर जीतेगी। अगले साल रक्षाबंधन पर वह स्वस्थ होकर अपने घर में मेरा स्वागत करेगी और उसी प्यार से मेरी कलाई पर राखी बांधेगी।
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