गीतकार के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1953 में अभिनेता प्रेमनाथ की फिल्म ‘गोलकुंडा का कैदी’ से की। इस फिल्म के लिये उन्होंने ‘लहर ये डोले कोयल बोले’ और ‘शहीदों अमर है तुम्हारी कहानी’ जैसे गीत लिखे, लेकिन उन्हें खास पहचान नहीं मिल सकी। अंजान ने अपना संघर्ष जारी रखा और इस दौरान कई छोटे बजट की फिल्मों के लिये गीत लिखे। इसी बीच उनकी मुलाकात जी.एस. कोहली से हुई। उनके संगीत निर्देशन में फिल्म ‘लंबे हाथ’ के लिए अंजान ने ‘मत पूछ मेरा है मेरा कौन’ गीत लिखा, जिसके जरिये उन्हें कुछ पहचान मिली।
लगभग दस वर्ष तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद वर्ष 1963 में पंडित रविशंकर के संगीत से सजी प्रेमचंद के उपन्यास ‘गोदान’ पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ में उनके लिखे गीत ‘चली आज गोरी पिया की नगरिया’ को सफलता मिली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अंजान को इसके बाद कई फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे, जिनमें ‘बहारे फिर भी आएंगी’, ‘बंधन’, ‘कब क्यों और कहां’, ‘उमंग’, ‘रिवाज’, ‘एक नारी एक ब्रह्मचारी’ और ‘हंगामा’ प्रमुख हैं।
साठ के दशक में अंजान ने संगीतकार श्याम सागर के निर्देशन में कई गैर-फिल्मी गीत भी लिखे। इन गीतों को मोहम्मद रफी, मन्ना डे और सुमन कल्याणपुरी जैसे गायकों ने स्वर दिया। मोहम्मद रफी की आवाज में उनका गीत ‘मैं कब गाता’ काफी लोकप्रिय हुआ था। अंजान ने कई भोजपुरी फिल्मों के लिये भी गीत लिखे। सत्तर के दशक में प्रदर्शित ‘बलम परदेसिया’ का ‘गोरकी पतरकी रे मारे गुलेलवा’ गीत आज भी लोगों की जुबान पर है।
अंजान के सिने करियर पर नजर डालें तो सुपरस्टार अमिताभ बच्चन पर फिल्माये उनके गीत बेहद लोकप्रिय रहे। वर्ष 1976 में प्रदर्शित फिल्म ‘दो अनजाने’ के गीत ‘लुक छिप लुक छिप जाओ ना’ की कामयाबी के बाद उन्होंने अमिताभ बच्चन के लिये कई सफल गीत लिखे। इनमें ‘बरसो पुराना ये याराना’, ‘खून पसीने की मिलेगी तो खाएंगे’, ‘रोते हुए आते हैं सब’, ‘ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना’ और ‘खइके पान बनारस वाला’ जैसे सदाबहार गीत शामिल हैं।
अमिताभ बच्चन के अलावा मिथुन चक्रवर्ती की फिल्मों के लिये भी अंजान ने कई सुपरहिट गीत लिखे। इनमें ‘डिस्को डांसर’, ‘डांस डांस’, ‘कसम पैदा करने वाले की’, ‘करिश्मा कुदरत का’, ‘कमांडो’, ‘हम इंतजार करेंगे’, ‘दाता’ और ‘दलाल’ प्रमुख हैं। जाने-माने निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा की फिल्मों के लिये भी अंजान ने कई यादगार गीत लिखे। उनके गीतों ने इन फिल्मों की लोकप्रियता में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। अंजान के पसंदीदा संगीतकारों में कल्याणजी-आनंदजी का नाम सबसे ऊपर आता था।
अंजान ने अपने तीन दशक से अधिक लंबे सिने करियर में करीब 200 फिल्मों के लिये गीत लिखे। लगभग तीन दशकों तक हिन्दी सिनेमा को अपने गीतों से समृद्ध करने वाले अंजान 67 वर्ष की आयु में 13 सितंबर 1997 को इस दुनिया से विदा हो गये। उनके पुत्र समीर ने भी बतौर गीतकार फिल्म इंडस्ट्री में अपनी खास पहचान बनाई है।