चीन तिब्बत में पर्यावरण का कर रहा अंधाधुंध दोहन, फ्लैश फ्लड की सूचना छिपाने का आरोप

By: Sep 1st, 2026 2:28 pm

नरेन कुमार- धर्मशाला।

हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा मुख्यालय धर्मशाला के साथ लगते मैकलोडगंज के तिब्बती सेटेलमेंट कार्यालय में मंगलवार को ‘एशिया का जल टावर संकट में : तिब्बत-नेपाल फ्लैश फ्लड में पारदर्शिता की मांग’ विषय पर प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की गई। अंतरराष्ट्रीय तिब्बत नेटवर्क और स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत-इंडिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने चीन पर तिब्बत के संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में अंधाधुंध निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का आरोप लगाया।

तिब्बत नीति संस्थान के पर्यावरण एवं विकास विभाग की शोधकर्ता धोंडुप वांगमो ने कहा कि ग्लेशियर झील के टूटने से आई बाढ़ की जानकारी पहले ही सामने आ गई थी, लेकिन चीन की ओर से समय रहते तिब्बत और नेपाल के लोगों को इसकी चेतावनी नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना केवल चीन की सेना तक सीमित रखी गई, जबकि आम लोगों को इससे अवगत नहीं करवाया गया। उन्होंने कहा कि चीन को ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी लेने के साथ प्रभावित लोगों को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय तिब्बत नेटवर्क की वरिष्ठ पर्यावरण शोधकर्ता डॉ. लोबसांग यांग्त्सो ने कहा कि चीन तिब्बत के संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बांध और अन्य ढांचागत परियोजनाएं विकसित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि करीब 190 बांधों के निर्माण की योजनाएं इस क्षेत्र के पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बड़े बांधों और सीमा क्षेत्र में निर्माण से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और इसका प्रभाव तिब्बत के साथ नेपाल, भारत और बांग्लादेश तक देखने को मिल सकता है।

खिद्रोंग के भिक्षु जेन जाम्पा पालदेन ने कहा कि तिब्बत में प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के बीच हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। कार्यक्रम में ताशी धोंडुप ने कहा कि तिब्बत में सूचनाओं पर नियंत्रण की स्थिति चिंताजनक है। आपदाओं से जुड़ी जानकारियों को भी राजनीतिक सूचना बताकर रोकने का आरोप उन्होंने लगाया।

वक्ताओं ने कहा कि तिब्बत के हिमालयी क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों और बांध परियोजनाओं पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत में सितंबर माह में ही प्रस्तावित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन के साथ तिब्बत, ब्रह्मपुत्र नदी और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से मेथोक बांध परियोजना को लेकर चीन की जवाबदेही तय करने और हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App