चप्पा-चप्पा खंगाला… पर 52 दिन से बच्चे गायब
देहरा में नहीं लगा कोई सुराग; न अपहरण हुआ और न ही ब्यास में बहे, पुलिस खाली हाथ
कार्यालय संवाददाता- देहरा गोपीपुर
52 दिन… 52 रातें हर दिन दरवाजे पर नजर, हर फोन की घंटी पर उम्मीद और हर आहट पर दिल की धडक़न तेज, शायद बच्चे लौट आए हों। लेकिन 52 दिन बाद भी कृष शर्मा और सक्षिव कुमार का कोई ठोस सुराग नहीं मिला। देहरा क्षेत्र के भगरोट गांव से लापता हुए दोनों छात्रों की गुमशुदगी अब परिवारों के लिए ऐसा दर्द बन चुकी है, जिसका हर गुजरता दिन इंतजार को और भारी कर रहा है। दोनों छात्र एक उच्च संस्थान में पढ़ते थे और 27 जुलाई को घर से निकले थे। इसके बाद वे वापस नहीं लौटे। उनके सामान बैग ब्यास नदी किनारे मिले थे, जिसके बाद नदी में बड़े स्तर पर तलाश की गई। शुरुआत में सबसे बड़ी आशंका ब्यास नदी में डूबने की रही। गोताखोरों और स्थानीय पुलिस टीमों के माध्यम से तलाश की गई। आसपास के क्षेत्रों और पोंग डैम क्षेत्र तक सर्च आपरेशन चलाया गया, लेकिन दोनों छात्रों का कोई सुराग सामने नहीं आया।
क्या नदी में हादसा हुआ, क्या दोनों किसी दूसरी दिशा में चले गए, क्या किसी ने उन्हें बहला-फुसलाकर कहीं ले गए या फिर इस गुमशुदगी के पीछे कोई ऐसी कड़ी है, जो अभी तक जांच एजेंसियों की पकड़ में नहीं आई। जानकारी अनुसार परिजनों ने पहले भी पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर जांच तेज करने और मामले को व्यापक स्तर पर देखने की मांग की है। मामले में पुलिस ने तकनीकी और डिजिटल सुरागों की भी पड़ताल की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब दर्जन वाहनों की जांच की गई और परिजनों की ओर से जताई गई अपहरण की आशंका के संबंध में एक रिश्तेदार की कॉल डिटेल तथा गतिविधियों की भी पड़ताल हुईए लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे दोनों के लापता होने की स्थिति स्पष्ट हो सके। पिता राजेश ने बताया कि दोनों बच्चे आखिरी बार दोपहर के समय महाविद्यालय से बाहर निकलते हुए देखे गए थे। इसके बाद वे कहां गए, उनके साथ क्या हुआ, यह अब भी रहस्य बना हुआ है। परिजन इस आशंका से भी चिंतित हैं कि कहीं उनका अपहरण तो नहीं हुआ या फिर कोई अन्य घटना हुई है। राजेश ने सरकार से केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई से मामले की गंभीरता से जांच करवाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने मानवाधिकार आयोग से भी हस्तक्षेप कर परिजनों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने में मदद की गुहार लगाई है।
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