जिला में तीन से आठ साल के बच्चों की होगी आंखों की होगी स्क्रीनिंग

By: Sep 2nd, 2026 12:02 am

उपायुक्त की महत्त्वाकांक्षी पहल मिशन दृष्टि बिलासपुर का विधिवत आगाज, पहले दिन 50 बच्चों की आंखों की जांच, दो में मिला दृष्टि दोष

दिव्य हिमाचल ब्यूरो-बिलासपुर
बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उचित उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार की महत्वाकांक्षी पहल मिशन दृष्टि बिलासपुर का मंगलवार को राजकीय प्राथमिक पाठशाला रौड़ा में विधिवत शुभारंभ किया गया। अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर रुपिंदर कौर ने अभियान का शुभारंभ किया। अभियान के शुभारंभ अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने राजकीय प्राथमिक पाठशाला रौड़ा और संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र के कुल 50 बच्चों की आंखों की जांच की गई। इनमें आंगनबाड़ी केंद्र के 12 बच्चों की स्क्रीनिंग में किसी भी बच्चे में दृष्टि संबंधी दोष नहीं पाया गया जबकि प्राथमिक पाठशाला के 38 बच्चों की जांच में 2 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष सामने आए। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि कम उम्र में बच्चों की आंखों में होने वाली दृष्टि संबंधी समस्या की समय पर पहचान न होने से इसका सीधा असर उनकी पढ़ाईए सीखने की क्षमता और समग्र विकास पर पड़ सकता है। छोटे बच्चे अक्सर अपनी दृष्टि संबंधी परेशानी को स्वयं पहचान या स्पष्ट रूप से बता नहीं पाते। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से आंखों की समस्या का शुरुआती स्तर पर पता लगाना बेहद महत्वपूर्ण है। समय रहते समस्या की पहचान होने पर आवश्यक उपचार और चश्मे के माध्यम से बच्चे की दृष्टि को बेहतर किया जा सकता है। अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि ष्मिशन दृष्टि बिलासपुरष् के तहत 1 सितंबर 2026 से जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 8 वर्ष के बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की जाएगी।

अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों की आंखों की समय पर जांच कर दृष्टि संबंधी कमियों की प्रारंभिक स्तर पर पहचान करना और आवश्यकता के अनुसार उन्हें उचित उपचार उपलब्ध करवाना हैए ताकि आंखों की समस्या उनकी पढ़ाई और भविष्य में बाधा न बने। ििबलासपुर जिला प्रशासन की मानें तो मिशन दृष्टि के पायलट चरण में प्राथमिक विद्यालय डियारा और आंगनबाड़ी केंद्र और डीएवी स्कूल चंगर में बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की गई। डियारा में जांच किए गए 52 बच्चों में 11 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष पाए गए थे जबकि डीएवी स्कूल चंगर में करीब 100 बच्चों की स्क्रीनिंग में लगभग 20 बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या अथवा रिफ्रैक्टिव एरर के संकेत मिले थे। पायलट चरण के इन परिणामों ने कम उम्र में नियमित नेत्र स्क्रीनिंग की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा के बोल
सीएमओ शशि दत्त शर्मा ने बताया कि स्क्रीनिंग की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। सबसे पहले बच्चों का स्नेलन चार्ट के माध्यम से विजन टेस्ट किया जाएगा। यदि प्रारंभिक जांच में दृष्टि संबंधी दोष पाया जाता हैए तो बच्चे की आगे की जांच ऑटो.रिफ्रैक्टर मशीन के माध्यम से की जाएगी। बच्चे की आंखों में रिफ्रैक्टिव एरर तथा चश्मे के संभावित नंबर का आकलन किया जाएगा। जिन बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या पाई जाएगी उन्हें आगे स्पेशलिस्ट के पास भेजा जाएगा।


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