रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर अमरीका की बोलती बंद, भारत बोला-ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
दिव्य हिमाचल ब्यूरो—नई दिल्ली
भारत ने अमरीकी कांग्रेस में रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पारित होने पर सधी हुई प्रतिक्रिया करते हुए कहा है कि वह इस मामले में आगे के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि भारत ने इस विषय का संज्ञान लिया है। सरकार इस मामले में आगे के घटनाक्रम पर नजर रख रही है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। इसके लिए भारत बदलती बाजार परिस्थितियों के आधार पर विविध स्रोतों से ऊर्जा की खरीद जारी रखेगा। वक्तव्य में कहा गया है कि पिछले कुछ महीनों में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से विभिन्न अमरीकी प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है। भारतीय पक्ष ने इस कानून के संभावित प्रभावों को न केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के संदर्भ में भी स्पष्ट रूप से सामने रखा है।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने कहा कि इन घटनाक्रमों के प्रभावों से निपटने के लिए वह भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी। उल्लेखनीय है कि अमरीकी संसद द्वारा पारित लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 रूस और ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाला एक नया विधेयक है। इस कानून के तहत अमरीकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वालों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का अधिकार है।
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