सरकारी सहायता से कोई पात्र बच्चा न छूटे

By: Sep 3rd, 2026 12:01 am

बाल हित सर्वोपरि, योजना से बाहर बच्चों को ‘सुख आश्रय’ से जोडऩे की तैयारी

दिव्य हिमाचल ब्यूरो-चंबा
उपायुक्त मुकेश रेप्सवाल ने कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में सभी संबंधित विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें और बाल हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उपायुक्त बुधवार को मिशन वात्सल्य के तहत प्रायोजन एवं पालक देखभाल अनुमोदन समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को पात्र बच्चों की पहचान की प्रक्रिया मजबूत करने और मामलों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। साथ ही योजनाओं के तहत लाभांवित बच्चों को मिलने वाली सहायता की निरंतरता सुनिश्चित करने को कहा, ताकि कोई भी पात्र बच्चा सरकारी सहायता से वंचित न रहे। बैठक में बच्चों को दी जा रही आर्थिक एवं सामाजिक सहायता, प्रायोजन योजना के तहत पात्र बच्चों को लाभ देने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में प्रायोजन कार्यक्रम के तहत 92 बच्चों को लाभांवित किया जा रहा है। वहीं, 26 बच्चों के मामलों में बाल कल्याण समिति द्वारा योजना का लाभ समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि योजना से बाहर किए गए बच्चों में पात्र बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार ‘सुख आश्रय’ अथवा ‘सुख शिक्षा’ योजना से जोडऩे की संभावनाओं पर कार्रवाई की जाए। बैठक में 22 नए बच्चों को प्रायोजन योजना का लाभ देने के मामलों पर भी चर्चा हुई। पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की समीक्षा के बाद समिति ने सभी 22 मामलों को मंजूरी प्रदान की। उपायुक्त ने पात्र बच्चों को नियमानुसार समय पर सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होने पर महिला एवं बाल विकास निदेशालय से पत्राचार करने को भी कहा। इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी राजेश राम, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष युगल किशोर मरवाह, बाल संरक्षण अधिकारी रिंकू शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


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