16 साल की देरी पर नहीं मिलेगी नौकरी अवैध बर्खास्तगी पर 2.5 लाख मुआवजा

By: Sep 29th, 2026 9:53 pm

दैनिक वेतनभोगी की सेवाएं समाप्त करने के मामले में फैसला

विधि संवाददाता-शिमला

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सेवा मामलों से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में माना है कि भले ही किसी दैनिक वेतनभोगी की सेवाएं अवैध रूप से समाप्त की गई हो और औद्योगिक विवाद अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन हुआ हो, लेकिन यदि मामला 16 वर्षों के अत्यधिक विलंब के बाद उठाया गया है, तो कर्मचारी को पुनर्नियुक्ति नहीं दी जा सकती। हालांकि न्यायाधीश संदीप शर्मा ने याचिकाकर्ता की नौ वर्षों से अधिक की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए श्रम न्यायालय की ओर से दिए गए 75,000 के मुआवजे को नाकाफी माना और इसे बढ़ाकर 2,50,000 कर दिया है। याचिकाकर्ता राज कुमार को मई 1987 में हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड में दैनिक वेतनभोगी बेलदार के रूप में नियुक्त किया गया था।

उन्होंने अगस्त 1996 तक कार्य किया। याचिकाकर्ता का आरोप था कि सितंबर 1997 में उन्हें बिना किसी नोटिस के सेवा से हटा दिया गया, जबकि उनसे कनिष्ठ (जूनियर) कर्मचारियों को काम पर बनाए रखा गया। श्रम न्यायालय ने माना कि धारा 25 एफ और 25जी का उल्लंघन हुआ है, लेकिन 16 साल की देरी से मांग पत्र देने के कारण पुनर्नियुक्ति का दावा खारिज कर दिया और केवल 75,000 का मुआवजा मंजूर किया। हार्इ कोर्ट ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बिजली बोर्ड को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को चार सप्ताह के भीतर 2,50,000 का भुगतान करे।


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