अध्ययन में गुणवत्ता की पारी

By: Sep 3rd, 2026 12:05 am

चार साल की स्नातक डिग्री के माध्यम से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षण पद्धति की विरासत बदलने का मकसद पाले हुए है। नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक डिग्री का चौथा वर्ष अध्ययन में गुणवत्ता का प्रेरक होगा। बीए आनर्ज या बीए आनर्स विद रिसर्च के मायने शिक्षण परिसर में छात्रों की उड़ान, विषय की समझ तथा प्रोफेशनल जिंदगी के तरानों को नजदीक से समझना होगा। शिक्षा एक रूटीन का विषय बनते हुए पाठ्यक्रम के कुछ अध्यायों में सिमट के रह गई है, जबकि इसके व्यावहारिक स्वरूप से छात्र समुदाय के सोच, नजरिए और योगदान में परिवर्तन लाने की गुंजाइश है। यह हिमाचल में शोध के नए मानदंड चित्रित कर सकता है, बशर्ते छात्र समुदाय को प्रेरित करने के सिद्धांत सक्रिय रहें। हिमाचल के छात्रों का मनोविज्ञान एक डिग्री को अमानत समझता है, तो यह उपलब्धियों का संसार नहीं, बल्कि औपचारिक शिक्षा का परिणाम है। शिक्षा का व्यावहारिक पक्ष अब तक तीन सालों की मेहनत को सिर्फ मजमून समझता था, जबकि प्रतिस्पर्धा के फलक पर विषयों की इबारत को अर्थपूर्ण ढंग से पेश करने की विधा विकसित होनी चाहिए। हिमाचल के समूचे अध्ययन व शोध से अब तक जो हासिल है, उसे या तो रोजगार को कार्यालयों या सरकारी नौकरी की भर्ती में देखा जा सकता है।

स्टार्टअप जैसे स्तर तक ज्ञान, इच्छाशक्ति, अधिमान और नवाचार को पहुंचाने के लिए न फैकल्टी तैयार मिली और न ही छात्रों को ऐसे संबोधन के लिए तैयार किया गया। जिस दिन डिग्री का महत्त्व नवाचार को जन्म देगा या आगे बढऩे की अभिलाषा रोजगार कार्यालय से किनारा कर लेगी, उस दिन डिग्री की महक, महत्त्वाकांक्षा और महत्त्व बदल जाएगा। देखने में जब तक डिग्रियां एक समान परिणामों की परिपाटी रहें या सारे कालेज एक ही वातावरण में तसदीक हों, कोई व्यापक अंतर नहीं आएगा। पिछले कुछ सालों में अधिकांश कालेज देखने में वाणिज्य या साइंस कालेज दिखाई दिए, लेकिन इनके माध्यम से स्नातकोत्तर की डिग्रियों का अवमूल्यन ही दिखाई दिया। प्रदेश में एमबीए की डिग्री लेकर भी छात्र अगर नौकरी की कतार में बेचारा है या एमए हिस्ट्री करके भी हिमाचल के इतिहास पर दो शब्द अर्जित नहीं हुए, तो फिर इस शिक्षा का अनुभव महज प्रमाणपत्र है। हमारे इंजीनियरिंग कोर्सिस अगर नवनिर्माण का आधार, जरूरतें, सुरक्षित वास्तु शास्त्र या चेतना नहीं बदल पा रहा है, तो डिग्रियों की आजमाइश में यह सफर अधूरा है। हिमाचल के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक, आर्थिक, कबायली और सामाजिक पक्ष पर केंद्रित अध्ययन की एक नई परिपाटी अगर डिग्री कोर्स की चौथे वर्ष की पाठशाला पूरी कर पाती है, तो इससे पढ़ाई का लक्ष्य, अध्ययन की गुणवत्ता, वैचारिक स्पष्टता और वैज्ञानिक आउटलुक बढ़ेगा। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में हिमाचली शिक्षा के फलक पर गुणकारी परिवर्तन होते हैं, तो यहां के छात्र भी प्रतिस्पर्धा में आगे निकलेंगे और रोजगार के नए बाजार में खुद को सिद्ध कर पाएंगे।


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