एनआईए मामलों पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, राज्यों को जल्द विशेष अदालतें शुरू करने के दिए निर्देश
दिव्य हिमाचल ब्यूरो— नई दिल्ली
विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यों से जल्द विशेष अदालतें शुरू करने को कहा, ताकि एनआईए के मामलों में सुनवाई में देरी न हो। एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ को बताया कि कई राज्यों ने इस संबंध में अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। मतलब इन राज्यों ने अब तक बताया ही नहीं है कि उनके यहां विशेष एनआईए अदालतें स्थापित की गई हैं या नहीं। सुनवाई के दौरान कर्नाटक के वकील ने बताया कि बंगलुरु में तीन विशेष अदालतें हैं और चिकमंगलूर में भी जल्द अदालत शुरू होने वाली है। केरल सरकार के वकील ने बताया कि उन्होंने विशेष अदालतों के लिए जगहों की पहचान कर ली है। राज्य में दो अदालतें स्थापित होनी है। उन्होंने अदालत से दो-तीन महीने का समय मांगा, लेकिन सीजेआई ने एक महीने में ही अदालतें शुरू करने को कहा। तमिलनाडु सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में दो विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि एक तो कार्यरत भी हैं। तेलंगाना सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में सिर्फ एक विशेष एनआईए अदालत की जरूरत है।
तेलंगाना में एनआईए के 13 मामले हैं। सीजेआई ने तेलंगाना सरकार को तीन हफ्ते में अदालतें शुरू करने का निर्देश दिया। असम में एनआईए के 26 मामले हैं। राज्य में एक विशेष अदालत काम कर रही है और दो और अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। सीजेआई ने असम से इस संबंध में चार हफ्ते में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। जम्मू कश्मीर में एनआईए के 46 मामले हैं और यहां सिर्फ एक विशेष अदालत है। सुरक्षा कारणों से अदालतें जम्मू में बनाने की बात कही गई। सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर में तीन और अदालतों की जरूरत बताई गई। मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कहा कि विशेष एनआईए अदालतों में दूसरे मामलों की सुनवाई नहीं होनी चाहिए, ताकि एनआईए के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा हो सके।
डॉक्टरों को पीटने वाले नेताओं को तुरंत हिरासत में लें
मुंबई। महाराष्ट्र में डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मारपीट की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं को तुरंत हिरासत में लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं, जिसमें उन्होंने कल्याण के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों पर हुए हमले के मामले में जमानत की शर्तों को चुनौती दी थी। उनके वकील मुकुल रोहतगी ने याचिका वापस ले ली है। महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि उसने म्हात्रे की जमानत रद्द करने की मांग की है। अदालत ने नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की है। एक दिन पहले भी एक अस्पताल में डॉक्टरों के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी।
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