मृत नहीं, बम-बम आर्थिकी
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की आर्थिक विकास दर 7.8 फीसदी आंकी गई है। हम इसे नकार नहीं सकते, क्योंकि यह भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय’ (एनएसओ) के अर्थशास्त्रियों का निष्कर्ष है। यह विकास दर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ईरान युद्ध का कालखंड रहा है। युद्ध के कारण तेल-गैस, उर्वरक, खाद्य और अन्य सामान के संकट दुनिया ने झेले हैं और युद्ध अब भी जारी है। सप्लाई चेन अब भी बाधित है। होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी लगभग बंद है। ईरान का डंडा चल रहा है, बेशक अमरीका कुछ भी दावे करे। युद्ध के अलावा, अल-नीनो और टं्रपवादी टैरिफ के प्रभाव भी रहे हैं, लिहाजा भारत की वास्तविक जीडीपी की यह दर और नॉमिनल जीडीपी की 10.3 फीसदी विकास दर, यकीनन, बेहतर अर्थव्यवस्था के प्रमाण हैं। यकीनन देश प्रगति कर रहा है। जीएसटी संग्रह भी 1.99 लाख करोड़ रुपए, यकीनन, एक रिकॉर्ड है। कमोबेश भारत की अर्थव्यवस्था ‘मृत’ नहीं है, जैसा कि राष्ट्रपति टं्रप ने उगला था। बाद में नेता प्रतिपक्ष (लोकसभा) राहुल गांधी ने न केवल ‘मृत अर्थव्यवस्था’ करार दिया, बल्कि ‘आर्थिक सुनामी’ की भविष्यवाणी भी की। देश ने दोनों को ही गंभीरता से नहीं लिया और अब ‘विकास की सुनामी’ का यथार्थ सामने है। भारत का खनन क्षेत्र ‘नकारात्मक’ (-2.4 फीसदी) रहा है, लेकिन कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग, निर्माण, सर्विस, व्यापार, होटल, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, लोक प्रशासन आदि क्षेत्रों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि पिछले साल की तुलना में कृषि की विकास दर ने 0.8 फीसदी का गोता खाया है, फिर भी यह 3.6 फीसदी रही है। मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस क्षेत्र में बढ़ोतरी क्रमश: 10.7 और 10 फीसदी दर्ज की गई है। उद्योग क्षेत्र की वृद्धि दर भी 5.2 फीसदी आंकी गई है। जीडीपी गणना की प्रक्रिया और प्रणाली पर प्रख्यात अर्थशास्त्रियों ने लगातार सवाल उठाए हैं।
वे इसमें 2.5 फीसदी के ‘फर्जीवाड़े’ का आकलन करते रहे हैं। हम फिलहाल इस विवाद को यहीं छोड़ते हैं। जीडीपी की विकास दर को स्वीकार करते हुए कुछ जिज्ञासाएं पेश करना चाहते हैं। हम महंगाई, गरीबी, करीब 81.5 करोड़ भारतीयों को ‘मुफ्त अनाज’ जैसे मुद्दे भी छोड़ते हैं, क्योंकि एक वर्ग इन मुद्दों को विकास दर में घुसाना ‘आर्थिक निरक्षरता’ मानता है। बहरहाल सवाल और जिज्ञासा यह है कि जीडीपी के ये आंकड़े देश के शीर्ष 100 अरबपतियों की तीन गुना बढ़ी संपत्तियों की बदौलत हैं अथवा इसमें देश के कामकाजी वर्ग, श्रम-बल, निजी खपत और निवेश के भी आंकड़े शामिल हैं? यदि हमारी अर्थव्यवस्था की विकास दर लगभग यही रही है या 7 फीसदी के करीब रही है, तो देश की प्रति व्यक्ति आय 2.35 लाख-2.72 लाख रुपए के बीच क्यों है? भारत दुनिया में 144-149वें स्थान तक क्यों रहता है? जर्मनी और जापान की प्रति व्यक्ति आय क्रमश: करीब 54-55 लाख रुपए और 29-30 लाख रुपए है। दोनों देश तीसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। कोई तुलना है क्या? क्रय-शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर भी भारत 121-125वें स्थान पर क्यों है? भारत और जापान की जीडीपी में कोई खास अंतर नहीं है। बहरहाल ‘आर्थिक असमानता’ की यह खाई कब तक भरी जाएगी? अरबपतियों की दौलत तो बढ़ती रहेगी, लेकिन आम आदमी की औसत आमदनी 1 फीसदी भी क्यों नहीं बढ़ पाई है? यदि प्रधानमंत्री मोदी इन सवालों का तार्किक जवाब दे पाएंगे, तो देश भी उनकी बधाई और शुभकामनाएं स्वीकार कर लेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ही, 18-29 साल के आयु-वर्ग के 14.8 फीसदी युवा बेरोजगार हैं। डिप्लोमा/डिग्री प्राप्त 29.4 फीसदी युवाओं के पास निश्चित, स्थिर काम नहीं है।
नीट श्रेणी के 40.1 फीसदी युवा बेरोजगार हैं। क्या इनसे भयावह यथार्थ कोई और हो सकता है? बेशक सरकार दावा कर रही है कि देश की बेरोजगारी दर 5.1 फीसदी है। यदि युवा जैसी सबसे उर्वर आयु और जमात बेरोजगार है, तो कौन-सी आर्थिकी ‘बम-बम’ है? एक और डराने वाला आंकड़ा सामने आया है कि करीब 8 करोड़ लोग वापस कृषि की ओर चले गए हैं। वे रोजगार में हैं अथवा बेरोजगार हैं, सरकार और नीति आयोग स्पष्ट करें। बेशक शेयर बाजार में विदेशी निवेशक बढ़े हैं, बीते एक साल में करीब 30 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया है, देश में 18 करोड़ ईपीएफ के नए खाते खुले हैं, लेकिन अभी यह विकास आश्वस्त करने वाला नहीं है। देश के आर्थिक विकास के लिए युवाओं को रोजगार प्रदान करना होगा। सार्वजनिक क्षेत्र में सरकारों के पास इतनी नौकरियां नहीं हैं कि सभी को सरकारी रोजगार दिया जा सके। इसलिए सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहन देना होगा, ताकि वह युवाओं को वांछित संख्या में रोजगार दे सके। युवाओं का प्रशिक्षण इस तरह करना होगा, कि वे रोजगार के लिए तैयार हो सकें। दसवीं के बाद ही यह व्यवस्था की जानी चाहिए कि युवा रोजगार के अनुकूल प्रशिक्षण पा सकें। तभी सच्चे अर्थों में भारत का विकास होगा।
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