शिक्षक को अपनी भूमिका समझनी होगी…

By: Sep 3rd, 2026 12:05 am

समाज में नैतिक मूल्यों का आए दिन क्षरण हो रहा है। पहले के मुकाबले आज परिस्थितियां बिल्कुल विपरीत हो चुकी हैं। वास्तव में मां-बाप अपने कर्तव्यों से विमुख होते जा रहे हैं और बच्चों की शिक्षा का दारोमदार शिक्षक के ऊपर छोड़ दिया है। फलस्वरूप बच्चों का भविष्य जहां गर्त में जा रहा है, वहीं शिक्षक भी इनके भविष्य के प्रति नाममात्र ध्यान देकर अपनी इतिश्री कर रहे हैं। जबकि शिक्षक को गुरु और भगवान के रूप में हमेशा देखा गया है। हर वर्ष पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षण संस्थानों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण किया जाएगा। विडंबना यह है कि शिक्षक को समाज आज वांछित इज्जत नहीं दे रहा है और न ही शिक्षक अपनी भूमिका को समझ पा रहा है।

-तुलसी राम डोगरा, पालमपुर


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