पीजीआई चंडीगढ़ में 57 डाक्टरों को बर्न इंजरी पर ट्रेनिंग, सड़क हादसों में घायलों की बचाएंगे जान
पीजीआई चंडीगढ़ में विशेषज्ञों ने साझा किए विचार, सडक़ हादसों में रोजाना 512 मौतों पर जताई चिंता
दिव्य हिमाचल ब्यूरो- चंडीगढ़
पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के आघात एवं जलने की चोटों के उपचार उत्कृष्टता केंद्र की ओर से हरियाणाए पंजाब और चंडीगढ़ के 57 डॉक्टरों के लिए आघात एवं जलने की चोटों के तत्काल उपचार संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय आघात एवं जलन संबंधी चोटों की रोकथाम एवं प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व डा. अतुल पराशर ने किया, जो पीजीआई चंडीगढ़ के प्लास्टिक शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख और आघात एवं जलने की चोटों के उपचार उत्कृष्टता केंद्र के नोडल अधिकारी हैं। एनेस्थीसिया विभाग की डा. निधि भाटिया ने सहनिदेशक तथा डा. अंकित दादरा ने कार्यक्रम समन्वयक की भूमिका निभाई। प्रशिक्षण के दौरान आघात और जलने की चोटों से पीडि़त मरीजों की शुरुआती जांच, उनकी स्थिति का आकलन और समय पर प्रभावी उपचार करने की व्यवस्थित प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया।
डा. अतुल पराशर ने सडक़ दुर्घटनाओं और जलने की घटनाओं से होने वाली मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में पांच लाख से अधिक लोग गंभीर सडक़ दुर्घटनाओं से प्रभावित हुए और 1.87 लाख लोगों की जान चली गई। यह प्रतिदिन औसतन 512 मौतों और हर घंटे लगभग 21 लोगों की मृत्यु के बराबर है। उन्होंने बताया कि करीब एक लाख लोग जलने की चोटों के कारण अस्पतालों में भर्ती हुए। जबकि ऐसे मामलों में मृत्यु दर 30 प्रतिशत से अधिक रही। उन्होंने समय पर प्राथमिक उपचार, त्वरित चिकित्सकीय सहायता और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।
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