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अगर आपको भी स्ट्रेस के बीच रहना है प्रोडक्टिव? तो अपनाएं ये आसान तरीके

By: Oct 1st, 2026 9:15 pm

आज के लाइफस्टाइल में स्ट्रेस से बचना आसान नहीं। इसकी वजह है सख्त डैडलाइन, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, आफिस में लंबे समय तक काम करना और पर्सनल व प्रोफेशनल जिम्मेदारियों में बैलेंस बनाने का दबाव किसी भी प्रोडक्टिव इंसान को थका सकता है। हालांकि हम अकसर अच्छी परफोर्मेंस की उम्मीद करने से पहले स्ट्रेस वाला टाइम बीतने का इंतजार करते हैं, लेकिन सच तो यह है कि स्ट्रेस के ऐसे ही पलों के बीच प्रभावी रूप से काम करना ही सबसे कीमती हुनर है। असल में तनाव के दौरान मस्तिष्क ‘सर्वाइवल मोड’ में चला जाता है। हाइपोथैलेमस और ऐमिग्डाला मिल कर कोर्टिसोल और ऐड्रेनालाइन जैसे हार्मोन छोड़ते हैं जो दिल की धडक़न बढ़ाते हैं। इस से तात्कालिक ऊर्जा तो मिलती है लेकिन लंबे समय तक रहने पर सोचने समझने की क्षमता कमजोर हो सकती है।

स्ट्रेस को करें मैनेज

स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए हमेशा अपने लाइफस्टाइल में बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती है। हमारी छोटी-छोटी और सोची समझी आदतें ही मुश्किल दिनों में भी हमारा फोकस, बढ़ाने में काफी मदद कर सकती हैं। काम करते रहना हर इंसान के लिए जरूरी है क्योंकि काम से ही आपका स्ट्रेस कम होता है। ऐसी ही कुछ प्रेक्टिकल टेक्नीक को अपना कर व्यक्ति अपने रोजमर्रा के स्ट्रेस को कम कर सकता है।

छोटे टास्क से करें काम शुरू

जब स्ट्रेस का लेवल बहुत ज्यादा होता है तो दिमाग हर बचे हुए काम को बराबर अर्जेंट समझने लगता है। इस से देरी  मैंटल पैरालिसिस हो सकता है। सब कुछ एक ही बार में निपटाने की कोशिश करने के बजाय ऐसे छोटे मैनेज हो सकने वाले टास्क से शुरुआत करें, जिसे अगले 10 से 15 मिनट में पूरा किया जा सकता हो। छोटा टास्क चाहे वह किसी जरूरी ईमेल का जवाब देना हो, अपने वर्कस्पेस को ऑर्गेनाइज करना हो या फिर किसी मीटिंग का एजेंडा तैयार करना हो, ये छोटी-छोटी विनिंग आपके कान्फिडेंस को वापस लाती हैं और मैंटल क्लैरिटी को बेहतर बनाती हैं।

छोटे ब्रेक लें

बहुत से लोगों का मानना है कि लगातार काम करना प्रोडक्टिव बने रहने का सब से बेस्ट तरीका है, लेकिन रिएलिटी में लंबे टाइम तक लगातार काम करने से मानसिक थकावट बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, कंसट्रेशन कम हो सकता है और स्ट्रेस का लेवल भी बढ़ सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि तय सीमा से अधिक काम करने पर एंग्जाइटी और तनाव के लक्षणों में वृद्धि हो सकती है। इसलिए हर 60 से 90 मिनट में छोटे ब्रेक लेने से दिमाग को रिकवर होने का मौका मिलता है। इस टाइम का इस्तेमाल स्ट्रेचिंग, वाक, पानी पीने या कुछ देर स्क्रीन से नजर हटाने के लिए कर सकते हैं।

दिमाग को रीसैट करें

स्ट्रेस की वजह से अकसर हमारी सांसें छोटी और तेज होने लगती हैं। यह बॉडी को ज्यादा अलर्ट रहने का सिग्नल होता है। कॉन्शियस ब्रीदिंग हमारे नव्र्स सिस्टम को शांत करने का सब से फास्ट और असरदार तरीका है। इसके लिए बहुत सिंपल टेक्नीक अपनाएं, अपनी नाक से 4 सेकंड तक धीरे-धीरे गहरी सांस अंदर खींचें, फिर 4 सेकंड के लिए अपनी सांस को होल्ड करके रखें और फिर उस के बाद 6 सेकंड तक धीरे-धीरे सांस को छोड़ें। इसे 5-6 बार रिपीट करने से फिजिकल टेंशन कम करने, तेजी से चल रहे विचारों को स्लो करने और एकाग्रता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।


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