ऊना में बदलेगी हिमाचल के आलू की शक्ल-सूरत, धंधड़ी में बनेगा पोटेटो प्रोसेसिंग प्लांट, पाउडर-स्नैक्स भी बनेंगे
धंधड़ी में 68 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला पोटेटो प्रोसेसिंग प्लांट, पाउडर और स्नैक्स भी बनेंगे
जतिंद्र कंवर — ऊना
प्रदेश के आलू उत्पादकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। हिमाचल का पहली आलू प्रोसेसिंग यूनिट ऊना में स्थापित होने जा रही है, जिसकी लागत 68 करोड़ रुपए आएगी। इस प्लांट के स्थापित होने के बाद ऊना जिला ही नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश खासकर कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और लाहुल के आलू उत्पादकों को मिट्टी के भाव आलू बेचने की टेंशन नहीं रहेगी। बताया जा रहा है कि पंचकूला की एआरएफएम कंपनी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत इस परियोजना को स्थापित करेगी। कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है और सरकार ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। धंधड़ी में आलू प्रसंस्करण इकाई स्थापित होगी, जबकि पेखूबेला में कोल्ड स्टोर बनाया जाएगा।
इसके लिए धंधड़ी में 55 कनाल और पेखूबेला में 50 कनाल भूमि चयनित की गई है। परियोजना शुरू होने से जिले के आलू उत्पादकों को फसल बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर एक नया विकल्प मिलने की उम्मीद है। आलू प्रोसेसिंग प्लांट में खेतों से आने वाले आलू को कच्चे रूप में बेचने के स्थान पर उससे विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। प्रस्तावित इकाई में आलू से पाउडर और स्नैक्स भी बनाए जाएंगे। आलू पाउडर का इस्तेमाल खाद्य उत्पादों में किया जा सकता है, जबकि स्नैक्स की बाजार में अलग मांग रहती है। इस तरह कच्चे आलू को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलकर उसकी खपत के नए रास्ते तैयार किए जाएगें।
हिमाचल में इतना आलू उगता है
देश में सबसे ज्यादा आलू उत्पादन वैसे तो उत्तर प्रदेश में होता है और क्षेत्रफल के लिहाज से उत्तर प्रदेश हिमाचल से 4.33 गुना बड़ा है। फिर भी देश-दुनिया का सबसे बेहतरीन आलू बीज हिमाचल में तैयार होता है। इस समय प्रदेश में 2.38 लाख टन आलू का उत्पादन हर वर्ष होता है। राज्य के 16960 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती होती है। यहीं नहीं, लाहुल का आलू दुनिया भर में बीज के लिए निर्यात किया जाता है। हिमाचल के आलू की एक और खासियत है कि यह रोगमुक्त होता है। प्रदेश में सब्जी के कुल क्षेत्र के 20 फीसदी हिस्से में आलू उगाया जाता है।
ऊना में आलू की पैदावार
ऊना जिले में करीब 1600 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती होती है। आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रतिवर्ष लगभग 30 से 35 हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। यहां पैदा होने वाले आलू की मांग दिल्ली, चंडीगढ़, जलंधर, होशियारपुर, सूरत, उडीसा, बिहार, यूपी, राजस्थान, फरीदाबाद, पंजाब सहित कई अन्य मंडियों में भी है।। ऊना का आलू नेपाल और बांग्लादेश तक भी पहुंच रहा है।
आढ़तियों पर निर्भरता घटेगी
वर्तमान में बाहरी राज्यों के व्यापारी और आढ़ती खेतों तक पहुंचकर किसानों से आलू खरीदते हैं। कई बार बाजार में कम दाम मिलने और खरीदी गई फसल का भुगतान समय पर न होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। प्रोसेसिंग प्लांट शुरू होने पर किसानों के पास कंपनी को आलू बेचने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार तलाशने में मदद मिलेगी।
कोल्ड स्टोरेज सुविधा
पेखूबेला में बनने वाला कोल्ड स्टोर भी परियोजना का अहम हिस्सा होगा। उचित तापमान पर आलू का भंडारण करने से उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और खराब होने की आशंका कम करने में मदद मिलेगी। प्रस्तावित परियोजना की लागत 68 करोड़ होगी। प्रदेश सरकार ने पंचकूला की एआरएफएम कंपनी के साथ एमओयू समझौता किया है। उक्त कंपनी पीपीपी मोड में आलू प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करेगी।
उत्पादकों को मिलेगा लाभ
जिले के अग्रणी आलू उत्पादक पंकज रायजादा ने कहा कि इससे ऊना के आलू उत्पादकों को लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर खरीद और समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था प्रभावी रही तो किसानों को बाहरी मंडियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। जिले के किसान आलू की कच्ची और पक्की दोनों फसलें उगाते हैं। जनवरी से अप्रैल और सिंतबर से नवंबर माह में फसल उगाई जाती हैं।
क्या है आलू प्रोसेसिंग यूनिट
पोटेटो प्रोसेसिंग प्लांट एक ऐसा कारखाना होता है, जहां कच्चे आलू को मशीनों के जरिए साफ करके और विभिन्न चरणों से गुजारकर खाने योग्य और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले उत्पादों में बदला जाता है।
ग्रेडिंग और छंटाई — खेतों से आए आलू की जांच होती है। सड़े-गले, हरे या खराब आलू को अलग किया जाता है और आकार के अनुसार उनकी छंटाई होती है।
धुलाई और सफाई — आलू पर लगी मिट्टी, धूल और पत्थरों को ड्राई ब्रश और पानी से अच्छी तरह धोया जाता है।
छिलका उतारना — मशीनों के माध्यम से आलू का छिलका निकाला जाता है।
कटाई और साइजिंग — आलू को उत्पाद के अनुसार अलग-अलग शेप में काटा जाता है, जैसे चिप्स के लिए पतले स्लाइस, फ्रेंच फ्राइज़ के लिए लंबी पट्टियां या क्यूब्स
स्टार्च निकालना — कटाई के बाद आलू को पानी से धोया जाता है, ताकि उसकी सतह पर मौजूद अतिरिक्त स्टार्च निकल जाए। इससे तलने पर चिप्स या फ्राइज़ कुरकुरे बनते हैं और आपस में चिपकते नहीं हैं।
ब्लांचिंग — आलू के टुकड़ों को गर्म पानी या भाप से हल्का पकाया जाता है। इससे उनमें मौजूद एंजाइम नष्ट होते हैं और रंग खराब नहीं होता।
सुखाना — तलने या फ्रीजिंग से पहले आलू की सतह के पानी को सुखाया जाता है।
फ्राइंग या फ्रीजिंग — जरूरत के हिसाब से इन्हें तेल में तला जाता है।
मसाला और कोटिंग — कई उत्पादों पर स्वाद के लिए मसाले या कोटिंग लगाई जाती है।
पैकेजिंग — अंत में तैयार उत्पाद को नाइट्रोजन गैस या वैक्यूम पैक के जरिए हवाबंद पैकेटों में पैक किया जाता है।
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