Dhanteras : ये रहे धनतेरस पर खरीददारी के शुभ मुहूर्त, इस दिशा में करें कुबेर और धन्वंतरि की स्थापना
आज धनतेरस पर सोना चांदी, घरेलू वस्तुएं खरीदने के बन रहे तीन योग
टीम-शिमला, जवाली
धन, वैभव, आरोग्य और मंगलकामनाओं का पर्व धनतेरस इस बार छह नवंबर, शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धनतेरस पर सोना-चांदी, आभूषण, नए बर्तन और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस बार खरीदारी के लिए तीन शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह आठ बजकर 16 मिनट से नौ बजकर 48 मिनट तक रहेगा। दूसरा शुभ अवसर अभिजीत मुहूर्त के रूप में सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
वहीं तीसरा मुहूर्त शाम छह बजकर दो मिनट से रात सात बजकर 58 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषियों का कहना है कि श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार इन अवधियों में सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि छह नवंबर को सुबह करीब नौ बजकर 30 मिनट पर आरंभ होगी और सात नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट तक प्रभावी रहेगी। उदयातिथि और प्रदोषकाल की मान्यता के अनुसार धनतेरस का पर्व छह नवंबर को ही मनाया जाएगा। इस दिन शाम को भगवान धन्वंतरि और धन के अधिष्ठाता भगवान कुबेर के साथ मां लक्ष्मी की पूजा.अर्चना का विशेष महत्त्व रहेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक छह नवंबर को सुबह पांच बजकर 49 मिनट से रात आठ बजकर 23 मिनट तक प्रदोषकाल की अवधि रहेगी। इस दौरान श्रद्धालु विधि.विधान से भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी का पूजन कर सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई आराधना से परिवार में आरोग्यए सुख.शांति और आर्थिक संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
उत्तर दिशा में करें कुबेर और धन्वंतरि की स्थापना
ज्योतिषियों के अनुसार धनतेरस की शाम पूजा स्थल पर उत्तर दिशा की ओर भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमाएं स्थापित कर दीप प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। भगवान कुबेर को सफेद मिठाई और भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई अर्पित करने के बाद ‘कुबेराय नम:’् मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके उपरांत भगवान धन्वंतरि के स्तोत्र का पाठ कर परिवार के उत्तम स्वास्थ्यए खुशहाली और समृद्धि की मंगलकामना की जा सकती है। दीपावली के दिन भगवान कुबेर की प्रतिमा को धन रखने के स्थान पर तथा भगवान धन्वंतरि को पूजा स्थल पर स्थापित करने की भी परंपरा बताई गई है।
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