Himachal: अंधेरी रात, दो लाशें और सामने मौत…फिर भी जीत गई 10 साल की बहादुर बच्ची
दिव्य हिमाचल टीवी डेस्क
कई बार किस्मत ऐसा खेल खेल देती है, जिसे समझना मुश्किल हो जाता है। आज की खबर की शुरूआत कैसे करें यह हमें भी समझ नहीं आ रहा। एक ओर किस्मत का दिया हुआ इतना गहरा जख्म है, जो सबकी आंखों को नम कर सकता है, तो दूसरी ओर उसी किस्मत का खेल कह लीजिए या ऊपरवाले की मेहरबानी या 10 साल की मासूम अन्नवी की हिम्मत, जो मौत को छूकर वापस लौट आई। घटना शिलाई की है, जहां बीती रात एक भयानक सडक़ हादसा हुआ, जरा सोच कर देखिए, जिस पिता की उंगली थामकर एक मासूम बेटी जिंदगी का सफर तय कर रही थी, उसी पिता और अपने छोटे भाई को उसने एक ही पल में हमेशा के लिए उस हादसे में खो दिया।
अपने भाई और पिता के साथ गाड़ी में सवार होकर कामोटा से शिलाई की ओर जा रहे थी, लेकिन क्या पता था कि रास्ते में काल इंतजार कर रहा है। उपमंडल शिलाई की ग्राम पंचायत कांडो भटनोल के समीप रविवार रात करीब 11:30 बजे इनकी गाड़ी अनियंत्रित हुई और गहरी खाई में जा गिरी। इसके बाद जो मंजर था, वह इतना भयावह था कि सुनने वालों का कलेजा कांप उठे, पिता मोहन और अन्नवी के छोटे भाई 8 वर्षीय शिवांशु ठाकुर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, लेकिन इस खौफनाक हादसे के बीच 10 साल की मासूम अन्नवी ने हिम्मत नहीं हारी। उसने संघर्ष किया और आखिर में मौत से जंग जीत भी गई।
घना अंधेरा, सुनने वाला कोई नहीं
अंधेरा घना था, मासूम की आवाज सुनने वाला भी कोई नहीं, पिता हमेशा के लिए खामोश हो चुके थे। शरीर पर हल्की चोटें थे, लेकिन 10 साल की मासूम अन्नवी को शायद समझ आ गया था कि किस्मत ने करूर खेल खेल दिया है, लेकिन इस वक्त जरूरत थी, जो हादसे में सुरक्षित बच गया, उसका राते के अंधेर में सुरक्षित रहना। अन्नवी बिना सोचे समझे बस घर की ओर चल दी। शरीर पर हल्की चोटें थीं, लेकिन शायद जहन में यह बात भी हो कि काश अपनों तक पहुंच जाए, तो बता सके कि पापा और भाई कहां हैं। हालांकि जैसे ही आसपास के लोगों को घटना के बारे में पता चला, वे मौके पर पहुंचे। शिलाई पुलिस भी मौके पर पहुंची। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने खाई में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद पिता-पुत्र के शवों को खाई से बाहर निकाला गया, लेकिन मासूम अन्नवी का कोई सुराग नहीं मिला। न ही अन्नवी घर पहुंची थी। फिर शुरू होता है सर्च ऑपरेशन। गहरी खाई से लेकर घने जंगल, खेत-खलिहान हर जगह अन्नवी को तलाशा जाने लगा। परिवार जो पहले ही बिखर चुका था, अब डर सताने लगा था कि बेटी कहां होगी किस हाल में होगी। सुबह हुई तो ड्रोन की मदद से अन्नवी की तलाश शुरू हुई और आखिरकार बच्ची को सुरक्षित बरामद किया गया।
कहां थी 10 साल की मासूम अन्नवी
हादसे के बाद अन्नवी घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर सुरक्षित मिली। बताया जा रहा है कि बच्ची हादसे के बाद घर ही जा रही थी, लेकिन अंधेरा घना होने के कारण रास्ते का पता नहीं लगा और वह दूसरे गांव में पहुंच गई। जब शायद थक गई होगी, तो वहीं खेत में रुक गई। जरा सोचिए उस मासूम बच्ची की हिम्मत जिसने अपनी आंखों के सामने इतना बड़ा हादसा देखा। खुद हादसे का शिकार हुई, लेकिन फिर भी बिना डरे, हिम्मत रखी और अपनों तक पहुंचने की कोशिश की। बताया जा रहा है अन्नवी को हल्की चोटें आई थीं, जिसका उपचार अस्पताल में किया गया। दूसरी ओर पिता पुत्र के शवों का पोस्टमार्टम करवाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया है। एसडीएम शिलाई यशपाल ने घटनास्थल पर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को 25-25 हजार रुपए की फौरी राहत राशि प्रदान की है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया है।
अन्नवी बच गई, पर पिता का साया उठ गया
हादसे में अन्नवी बच गई, लेकिन बचपन में ही पिता का साया उठ गया। एक ही परिवार के दो सदस्यों की असमय मौत से कामोटा गांव सहित पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। हादसे ने एक परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दीं। अन्नवी की मां पुलिस में हैं। उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उस मासूम अन्नवी को संभालने की है, जिसने इतनी छोटी उम्र में जिंदगी का सबसे बड़ा दुख झेला है। पिता और भाई के बिना उसकी आगे की राह आसान नहीं होगी, वो एक रात शायद अन्नवी कभी भुला भी नहीं पाएगी, हादसे में अन्नवी का सुरक्षित बचना भले ही किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन परिवार के लिए यह जख्म शायद ताउम्र नहीं भर पाएगा।
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