3.50 करोड़ फंडिंग विवाद : न सर्वेश कभी आईआईटी जोधपुर गया, न दस लाख रुपए इनाम लिया
तकनीकी शिक्षा विभाग की टीम ने खंगाला रिकार्ड, जांच टीम ने छात्र से जुड़े दस्तावेज भी कब्जे में लिए
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित बहुतकनीकी संस्थान से जुड़े ड्रोन प्रोजेक्ट मामले में 3.5 करोड़ रुपए की फंडिंग मिलने का दावा करने वाले छात्र सर्वेश शर्मा के मामले को सुलझाने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा गठित की गई जांच कमेटी मंगलवार को ज्वाइंट डायरेक्ट की अगवाई में हमीरपुर पहुंची। जांच टीम ने सर्वेश के होस्टल के कमरे से लेकर उसके क्लासरूम इत्यादि का निरीक्षण करने के अलावा सर्वेश के सहपाठियों, शिक्षकों और संस्थान प्रबंधन के बयान भी लिए। बताया जा रहा है कि सर्वेश से जुड़ा कुछ रिकार्ड भी जांच कमेटी ने कब्जे में लिया है। बुधवार को भी जांच टीम के यहीं रुकने की बात कही जा रही है। हालांकि इस मामले में न तो कॉलेज प्रबंधन न ही जांच कमेटी की ओर से कोई बोलने को तैयार है। बता दें कि ड्रोन विकसित करने के नाम पर 3.5 करोड़ रुपए की फंडिंग और सर्वेश शर्मा द्वारा किए दावों के बात यह मामला काफी उलझ गया है।
सर्वेश ने जो कहा वो साक्ष्यों से कहीं भी मेल नहीं खा रहा। सर्वेश ने आईटीआई जोधपुर में प्रतियोगिता में जाकर पंजीकरण और भागीदारी की बात कही, लेकिन आईआईटी जोधपुर ने प्रतियोगिता में उसके पंजीकरण और भागीदारी से इनकार किया है, क्योंकि सर्वेश न तो जोधपुर गया था और न ही आईआईटी जोधपुर की ओर से ड्रोन प्रतियोगिता में उसका पंजीकरण मिला है। आईआईटी के जनसंपर्क विभाग ने भी प्रतियोगिता में उसकी भागीदारी से मना किया है। ऐसे में चौथा स्थान हासिल करना और दस लाख रुपए इनाम मिलने का दावा भी सवालों के घेरे में आ गया है।
प्रिंसीपल और सर्वेश के पिता के बयान अलग
आईआईटी जोधपुर और कोणार्क कोर की ओर से 17 और 18 जुलाई को ड्रोन प्रतियोगिता करवाई गई। सर्वेश ने इसी प्रतियोगिता में भाग लेने और चौथा स्थान हासिल करने का दावा किया था। इस संबंध में संस्थान के प्रिंसीपल और सर्वेश के पिता के बयान भी अलग-अलग रहे हैं। प्रिंसीपल के अनुसार सर्वेश ने उन्हें बताया था कि वह ट्रेन से जोधपुर जाकर प्रतियोगिता में शामिल हुआ। पिता का कहना है कि बेटे ने ऑनलाइन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की बात कही थी।
पीजीआई में छात्र की सेहत में सुधार
सर्वेश ने 27 अक्तूबर को डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (डीआईओ) को ई-मेल भेजकर साइबर ठगी की शिकायत भी की थी। इसमें उसने अनुबंध और प्रतियोगिता में चौथा स्थान मिलने के प्रमाणपत्र का उल्लेख किया था। अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उससे एक बात तो स्पष्ट हो रही है कि सर्वेश साइबर ठगों के जाल में फंस गया था। सर्वेश फिलहाल चंडीगढ़ पीजीआई में उपचाराधीन है, उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
जांच कमेटी की रिपोर्ट पर रहेगी नजर
जांच कमेटी पता लगाएगी कि सर्वेश किन लोगों के संपर्क में था। उसे प्रतियोगिता और फंडिंग से संबंधित दस्तावेज किसने और कैसे उपलब्ध करवाए और 3.5 करोड़ की मंजूरी का दावा किस आधार पर किया गया। कंपनी के पंजीकरण, डीआईओ से हुए पत्राचार और व्हाट्सएप ग्रुप में साझा संदेशों की भी पड़ताल होगी।
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