हरोली और कुटलैहड़ को बड़ी सौगात… साढ़े 13 करोड़ के मिले गिफ्ट
सात हजार लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा होगी मुहैया, करीब 112 हेक्टेयर क्षेत्र की होगी सिंचाई, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने पेयजल योजनाओं का किया लोकार्पण
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-ऊना
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शनिवार को ऊना जिले के हरोली और कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्रों में जल शक्ति विभाग की लगभग 13.50 करोड़ रुपये लागत की 8 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इस दौरान विधायक विवेक शर्मा भी उनके साथ रहे। उपमुख्यमंत्री ने हरोली विस में नलकूप आधारित 2.66 करोड़ की उठाऊ पेयजल योजना दुलैहड़, 1.04 करोड़ की उठाऊ सिंचाई योजना पोलियां (झोल माजरा), 1.95 करोड़ की उठाऊ पेयजल योजना हलेड़ा, बिलना, बाड़ेवाल, लूथडे एवं धुग्गे, 1.08 करोड़ की उठाऊ सिंचाई योजना बट्ट कलाँ, 1.06 करोड़ की उठाऊ सिंचाई योजना पालकवाह, 1.01 करोड़ की उठाऊ पेयजल योजना निचला बढेड़ा और 1.28 करोड़ रुपये की उठाऊ सिंचाई योजना खड्ड (मोहल्ला डाडियां) का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं के माध्यम से जहां एक ओर लगभग 7 हज़ार लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी।
लोअर कुटलैहड़ को 46 करोड़ की सिंचाई योजना जल्द
कुटलैहड़ के कोट में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 118 करोड़ रुपये की पेयजल एवं सिंचाई योजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। इनमें से करीब 62 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। शेष कार्यों को भी तेज गति से पूरा किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोअर कुटलैहड़ की 46 करोड़ रुपये की सिंचाई योजना अगले दो महीनों के भीतर स्वीकृत कर दी जाएगी और इसके साथ ही इसका कार्य भी शुरू हो जाएगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री द्वारा बंगाणा में शिलान्यास की गई 14.92 करोड़ रुपये की तुरकाल पंगा योजना को भी रिकॉर्ड समय में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने गोविंद सागर झील के साथ लगते अंदरोली क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय से बोटिंग सहित अन्य सुविधाओं के लिए सहमति प्राप्त हो चुकी है, जिसे शीघ्र ही धरातल पर उतारा जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पहले भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड द्वारा गोविंद सागर झील के उपयोग पर जो प्रतिबंध थे, अब वे समाप्त हो चुके हैं। केंद्र सरकार से अब इसे लेकर अनुमति प्राप्त हो चुकी है। प्रदेश अब झील के उपयोग को योजनाएं बनाने में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि गोविंद सागर झील पर प्रदेश का सबसे बड़ा मंदली-लठियानी पुल लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। सडक़ सहित इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,000 करोड़ रुपये है।
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