सावधान! बुजुर्ग ही नहीं, बच्चों में भी बढ़ गया इस साइलेंट बीमारी का खतरा, तेजी से बढ़ रहे मामले
एक समय था जब ये कहा जाता था कि बचपन के दिन सबसे अच्छे होते हैं, न कोई फिक्र न किसी की परवाह, बस किताबों, छोटी- मोटी तू तू- मै मैं में और खिलौनों के बीच ही पूरा बचपन बीत जाता था। लेकिन आज के दौर में बच्चों का बचपन भी बीमारियों से घिर गया है , ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंक् बच्चे भी अब दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियों के शुरुआती जोखिम में जी रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव और खानपान में आ रहे बदलावों के कारण अब हाईपर टेंशन यानी उच्च रक्तचाप की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। चिंताजनक बात यह है कि अब छोटे बच्चों और युवाओं में भी यह बीमारी तेजी से देखने को मिल रही है। बीते साल नवंबर महीने में ही सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2000 में जहां करीब 3.2 फीसदी बच्चे हाई ब्लड प्रेशर का शिकार थे, वहीं 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 6.2 फीसदी को पार कर गया है। मतलब की दुनिया में 19 वर्ष या उससे छोटे 11.4 करोड़ बच्चे इस समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाईपर टेंशन एक ‘साइलेंट बीमारी’ है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो इससे हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी संबंधी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन अजय पाठक ने भी इस मामले पर बात की है उन्होनें लोगों को जागरूक करते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है। डॉ. अजय पाठक ने बताया कि पहले उच्च रक्तचाप की बीमारी आमतौर पर अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब बदलती दिनचर्या और खानपान के कारण बच्चों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों का अधिक समय मोबाइल फोन, टीवी, कम्प्यूटर और वीडियो गेम में बीत रहा है, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधियां लगातार कम हो रही हैं। इसके अलावा बाहर का तला-भुना भोजन, फास्ट फूड, अधिक नमक और मीठे पेय पदार्थों का सेवन भी बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है।
यही नहीं बच्चों में बढ़ता मोटापा उच्च रक्तचाप का सबसे बड़ा कारण बन गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार मोटापे से ग्रस्त 19 फीसदी बच्चे हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हैं। वहीं स्वस्थ वजन वाले बच्चों में यह दर महज 2 से 2.5 फीसदी दर्ज की गई। वहीं बहुत से बच्चे प्री-हाइपरटेंशन का शिकार भी बन रहे हैं। प्री-हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है, जहां से शरीर में उच्च रक्तचाप की शुरूआत होती है। तो कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि बच्चों में बढ़ता तनाव उनके शरीर को बीमारियों को घर बना रहा है। लगातार तनाव, पढ़ाई का दबाव, नींद पूरी न होना और व्यायाम की कमी भी हाईपर टेंशन को बढ़ावा दे रही है। कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि बार-बार सिरदर्द होना, चक्कर आना, थकान महसूस होना, चिड़चिड़ापन, सांस फूलना और कमजोरी जैसे संकेत उच्च रक्तचाप के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत चिकित्सकीय जांच करवाना जरूरी है।
यही नहीं अभिभावकों को भी बच्चों की दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना होगा, बच्चों को सुबह-शाम सैर, योग, खेलकूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें। घर में संतुलित और पौष्टिक भोजन दें और जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक का सेवन कम करवाएं। यही नहीं बच्चों को पर्याप्त नींद मिलना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती है। ऐसे में हम जितना सतर्क रहेंगे उतना ही सुरक्षित हमारा भविष्य होगा।
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