सुबह-शाम ट्रैफिक का टॉर्चर: हमीरपुर की डबललेन सडक़ पर गाडिय़ों की रफ्तार फेल
रेंग-रेंगकर चलती बसें भी बन रही जाम का मुख्य कारण, सुबह के समय आठ से दस बजे तक कई बार जाम से हालत खराब, स्कूली छात्र हो रहे परेशान
स्टाफ रिपोर्टर – हमीरपुर
शहर की सडक़ पर जाम लगना अब आम बात हो चली है। गाडिय़ों की बढ़ी संख्या और निजी बसों की धीमी गति जाम जैसे हालात पैदा कर रही है। सुबह आठ से लेकर 10 बजे तक तथा शाम को तीन बजे से लेकर पांच बजे तक शहर की सडक़ पर जाम जैसे हालात देखे जा सकते हैं। बेशक चौराहों पर ट्रैफिक कर्मचारी अपनी सेवाएं देने के लिए मुस्तैद हैं फिर भी जाम जैसी स्थिति पैदा होती रहती है। ऐसे हालात सिर्फ शहर की सडक़ पर ही पैदा नहीं होते, बल्कि कुछ किलोमीटर की दूरी पर अणु इलाका भी इससे अछूता नहीं है। अणु सडक़ मार्ग पर भी दिन के समय जाम की स्थिति बन जाती है। अणु में भी काफी प्रतिष्ठित व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं जहां पर ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। यहां कई बार सडक़ मार्ग किनारे वाहनों को पार्क देखा गया है जोकि जाम की वजह बन रहे हैं। बताना जरूरी है कि हमीरपुर शहर की सडक़ डबललेन है तथा वाहनों की दिन भर आवाजाही रहती है। मुख्यालय होने के कारण तथा शहर में सरकारी कार्यालय व नामी शिक्षण संस्थान होने की वजह से सुबह के समय काफी संख्या में वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं।
सुबह आठ बजे से दस बजे तक वाहनों की काफी अधिक आवाजाही रहती है। यदि बात बस अड्डा से लेकर नादौन चौक तक की करें तो इस मार्ग पर कई बार जाम जैसे हालात बन जाते हैं। इसका एक मुख्य कारण हमीरपुर बस अड्डा का सीमित दायरा भी माना जाता है। सुबह के समय काफी संख्या में बसें अड्डा में पहुंचती हैं लेकिन स्पेश की कमी की वजह से कई बसें काफी समय तक प्रवेश गेट से बाहर ही तरफ रहती हैं। इन्हें अंदर प्रवेश करने में समय लग जाता है जिस कारण जाम जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। हालांकि कई बार सडक़ मार्ग किनारे खड़े वाहन भी जाम की वजह बनते देखे गए हैं। यह समस्या आज की नहीं है बल्कि पिछले कई वर्षों की है तथा इसे सुधारने के प्रयास पूर्व की भांति आज भी चल रहे हैं। दिन भर ट्रैफिक कर्मी तैनात रहते हैं तथा वाहन चालकों को निर्देशित करते हैं। भोटा चौक, बस अड्डा परिसर के बाहर, नादौन चौक पर यातायात कर्मी की लगातार ड्यूटी रहती है ताकि जाम जैसे हालातों से जल्द निजात मिल जाए। लोगों की माने तो वर्तमान में गाडिय़ों की संख्या बढ़ रही है।
निजी बसों की मनमर्जी से लगा महाजाम
जाम लगने का कारण निजी बसों की धीमी गति भी रहता है। बस अड्डा से बाहर निकलने के बाद सडक़ मार्ग पर भी निजी बसें सवारियां बैठा लेती हैं। हालांकि निर्देश हैं कि बस अड्डा के अंदर ही सवारियां बैठाई जाएं, लेकिन देखा गया है कि बाहर भी सवारियां बैठा ली जाती है। बस को नादौन चौक तक धीमी गति में चलाया जाता है तथा बस के पीछे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
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