पहली बारिश में शिमला बेहाल, कई जगह भूस्खलन
रिज, मिनी कुफटाधार और भट्टाकुफर में भूस्खलन से नुकसान; चमियाणा रोड पर पेड़ गिरने से चार गाडिय़ां क्षतिग्रस्त, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
मानसून की पहली बारिश ने सोमवार को ही राजधानी शिमला में अपने तीखे तेवर दिखा दिए। लगातार बारिश से शहर के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन, जलभराव, सडक़ें क्षतिग्रस्त होने और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। रिज मैदान के समीप चर्च-झांसी पार्क मार्ग, मिनी कुफटाधार और भट्टाकुफर फलमंडी सबसे अधिक प्रभावित रहे, जबकि चमियाणा रोड पर सूखा पेड़ गिरने से चार वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। लगातार बिगड़ते हालात से लोगों में दहशत का माहौल है। रिज मैदान स्थित चर्च के समीप झांसी पार्क जाने वाले मार्ग का डंगा भरभराकर गिर गया। इससे चर्च से यूएस क्लब जाने वाली सडक़ में भी दरारें पड़ गई हैं और दोबारा बड़े भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। एहतियातन नगर निगम ने प्रभावित हिस्से को तिरपाल से ढक दिया है, लेकिन लगातार बारिश जारी रहने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह शहर का प्रमुख पैदल मार्ग है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आवाजाही करते हैं। मिनी कुफटाधार में नाला अवरुद्ध होने से पानी और मलबा सडक़ पर आ गया, जिससे सडक़ नाले में तब्दील हो गई। जगह-जगह गड्ढे बनने से पैदल चलना जोखिम भरा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्षद ने कई बार नगर निगम और लोक निर्माण विभाग से सडक़ की मरम्मत तथा नाले में कलवर्ट लगाने की मांग उठाई थी, लेकिन समय रहते काम नहीं होने से हालात बिगड़ गए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया तो बड़ा भूस्खलन हो सकता है। भट्टाकुफर फलमंडी में भी लगातार बारिश के कारण ऊपर की पहाड़ी से पत्थर और मिट्टी दरककर नीचे आने लगी। सोमवार सुबह करीब 11 बजे भारी मात्रा में मलबा गिरने से फलमंडी की छत पर पत्थर आ गिरे। बारिश का पानी मंडी के भीतर पहुंचने से कई स्थानों पर जलभराव हो गया और फलों की पेटियां भीगने से बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय बढ़ाने, नालों की सफाई और क्षतिग्रस्त सडक़ों व डंगों की शीघ्र मरम्मत की मांग उठाई है।
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