हिमाचल पर मंडराया संकट- बारिश के बीच बढ़ा इस बीमारी का खतरा, विभाग भी सतर्क
हिमाचल प्रदेश में इन दिनों कुदरत का कहर लगातार जारी है। पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने देवभूमि की रफ्तार पर ब्रेक सी लगा दी है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। कहीं पहाड़ दरक रहे हैं, तो कहीं नदियां उफान पर हैं, जिससे लोगों की मुश्किलें पहले से ही बढ़ी हुई थीं। लेकिन इन सबके बीच, बरसात के इस मौसम में एक और बड़ा और गंभीर खतरा हिमाचल में तेजी से दस्तक दे चुका है, और वह है ‘पीलिया’ का प्रकोप। जरा सोचिए, जिस पानी की बूंद का आनंद आप लेते हैं, वही पानी अगर दूषित हो, तो जिंदगी पर कितना भारी पड़ सकता है? पहाड़ों में अक्सर पीने के पानी के स्रोत बारिश के दिनों में दूषित हो जाते हैं, और लापरवाही का यही छोटा सा नतीजा बेहद गंभीर रूप ले लेता है। अस्पतालों में अचानक बढ़ने लगी मरीजों की संख्या इस बात की गवाह है कि खतरा अब दस्तक दे चुका है।
बरसात के दिनों में जल स्रोतों के दूषित होने की आशंका सबसे अधिक होती है। बाढ़, भूस्खलन और मिट्टी मिलने के कारण पीने के पानी की पाइपलाइनें प्रभावित होती हैं, जिससे दूषित पानी घरों तक पहुंच जाता है। जिसकी वजह से हिमाचल में पीलिया का प्रकोप बढ़ गया है। और इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है कुल्लू में। कुल्लू जिला मुख्यालय में पीलिया की बीमारी का प्रकोप फैला है जिससे कई क्षेत्रों में लोगों को दूषित पानी पीने के कारण पीलिया की बीमारी से ग्रसित हुए हैं। अस्पताल में पीलिया के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बता दें की क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में पिछले दो सप्ताह में 70 लोगों ने पीलिया का इलाज करवाया है जिसमें से 30 लोग ठीक हुए हैं जबकि 40 लोग क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में उपचार आधीन है जिसमें 15 छोटे बच्चे भी शामिल है। ऐसे में उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा ने जल शक्ति विभाग को पेयजल के जांच के निर्देश दिए हैं वही कुल्लू जिला मुख्यालय में गांधीनगर शिक्षण माटी सहित आप पर ढालपुर के एरिया में लोग दूषित पानी पीने से पीलिया का शिकार हो रहे हैं। उपायुक्त ने कहा कि कुल्लू जिला मुख्यालय के आसपास के क्षेत्र में पीने के पानी दूषित होने से पीलिया की बीमारी से लोग ग्रसित हो रहे हैं, उन्होंने कहा कि संबंध में जल शक्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग के साथ समीक्षा बैठक की है जिसमें जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को पेयजल आपूर्ति में जांच के निर्देश दिए गए हैं। बात राजधानी शिमला की करें तो, बरसात में जलजनित बीमारियों के मामले सामने आने शुरू हो गए हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आइजीएमसी) में पीलिया के रोजाना दो से तीन मामले आ रहे हैं। यह मामले बीते सोमवार से अस्पताल में आ रहे हैं। मामले शहर में अलग-अलग जगहों के हैं। ऐसे में अभी कहीं क्लस्टर नहीं बना है लेकिन आने वाले दिनों में मामले बढ़ने की आशंका है। बीते दिनों अस्पतालों में पेट दर्द के मामले आने शुरू हुए थे लेकिन अब पेट दर्द के साथ पीलिया से पीड़ित भी उपचार के लिए अस्पताल में पहुंच रहे हैं। ऐसे में आईजीएमसी के मेडिसिन वार्ड में कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। एहतियात के तौर पर चिकित्सक मरीजों के टेस्ट भी करवा रहे हैं ताकि संबंधित बीमारी का उपचार किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों ने भी बरसात में जलजनित बीमारियों के बढ़ती आशंका को देखते हुए एडवाइजरी जारी कर दी है। लोगों से आग्रह किया है कि पानी को उबालकर ही सेवन करें। जिला स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को भी अलर्ट मोड पर रखा है। साथ ही जगहों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। बारिश से शहर के कई हिस्सों में मटमैला पानी की सप्लाई हो रही है। हालांकि, आपूर्ति करने वाली कंपनी पानी को फिल्टर करने के बाद ही योजनाओं से लिफ्ट कर रही है। फिर भी पानी मटमैला आ रहा है। अगर लोग इस पानी का सेवन करते है तो बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है।
बरसात के मौसम में जरा सी लापरवाही पीलिया जैसी गंभीर बीमारी को बुलावा दे सकती है। इस संक्रमण से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए इन जरूरी बातों का खास ख्याल रखें। हमेशा उबला हुआ या अच्छी तरह फिल्टर किया हुआ साफ पानी ही पिएं। खाना खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं। हमेशा ताजा और ढका हुआ खाना खाएं। बाहर का खुला, बासी या दूषित खाना खाने से बचें। फल और सब्जियों को खाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। देखिए बारिश की इस आफत के बीच लापरवाही से होने वाली बीमारियां बुलावा देकर नहीं आतीं। इसलिए थोड़ी सी सतर्कता आपको और आपके परिवार को इस खतरनाक पीलिया के साए से दूर रख सकती है। एहतियात बरतना बेहद जरूरी है ताकि बारिश की आपदा के बीच किसी स्वास्थ्य आपदा से बचा जा सके। पर बचाव पूरी तरह हमारे अपने हाथ में है। तो आप सभी सुरक्षित रहें, सतर्क रहें।”
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