खुंडी मराली डल में उमड़ा आस्था का सैलाब, मां काली के जयकारों से गूंजा चुराह
3750 मीटर ऊंचाई पर आस्था का महासंगम, 16 किलोमीटर कठिन सफर के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने किए खुंडी मराली डल के दर्शन
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-चंबा
उपमंडल चुराह के चांजू क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खुंडी मराली डल झील में मंगलवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ऐतिहासिक खुंडी मराली जातर के अवसर पर चुराह सहित चंबा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार कर पवित्र डल झील के दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा खुंडी मराली क्षेत्र मां काली के जयकारों से गूंज उठा। जातर की प्रमुख धार्मिक परंपरा के तहत मां काली के गूरों और चेलों ने विधि-विधान के साथ पवित्र डल तोडऩे की रस्म निभाई।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मां काली का आशीर्वाद लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा। खुंडी मराली डल झील मां काली को समर्पित पवित्र धार्मिक स्थल है। यहां आयोजित होने वाली जातर चुराह की प्राचीन देव परंपरा और लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। श्रद्धालु मां काली के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। स्थानीय मान्यता है कि भाद्रपद माह के ज्येष्ठ मंगलवार को खुंडी मराली महाकाली डल में स्नान करने और मन्नत मांगने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। एसडीएम चुराह राजेश जर्याल ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से यात्रा शांतिपूर्वक संपन्न हुई। दो दिवसीय खुंडी मराली महाकाली डल जातर के समापन के साथ चुराह में देव संस्कृति और लोगों की अटूट आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला।
चांजू से 16 किलोमीटर कठिन पैदल सफर
खुंडी मराली डल तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चांजू क्षेत्र से करीब 16 किलोमीटर का दुर्गम पैदल सफर तय करना पड़ता है। रास्ते में कठिन चढ़ाई, नदी-नालों और ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों को पार करना पड़ता है। इसके बावजूद आस्था श्रद्धालुओं के कदम नहीं रोकती, हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस धार्मिक यात्रा में शामिल होते हैं। खुंडी मराली डल समुद्र तल से करीब 3750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बताई जाती है।
देव परंपरा का अनूठा संगम
खुंडी मराली जातर के दौरान स्थानीय देव परंपराओं के अनुसार विभिन्न धार्मिक रस्में निभाई जाती हैं। गूरों और चेलों की अगुवाई में होने वाली पारंपरिक रस्में इस यात्रा को विशेष बनाती हैं। श्रद्धालु इन रस्मों के साक्षी बनने और मां काली का आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।
तीन देवियों के मिलन की भी परंपरा
खुंडी मराली जातर के दौरान चांजू वाली काली माता और लिल्ह क्षेत्र की देवियों के चिन्ह खुंडी माता के दरबार तक लाने की परंपरा भी जुड़ी हुई है। श्रद्धालु इस पवित्र मिलन के साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।
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