खिलौनों की तरह बहती दिखी बसें, चुटकी में पानी में समाया टर्मिनल, जानिए अचानक बाढ़ आने की वजह

By: Aug 27th, 2026 12:07 am

नेपाल-चीन बॉर्डर पर पहाड़ी सुनामी की चपेट में आए ग्यिरॉन्ग पोर्ट के बस टर्मिनल का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है। इंटरनेट पर सैलाब में ध्वस्त होते टर्मिनल का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें जान बचाने के लिए भागते लोग चींटी की तरह दिखाई दे रहे हैं। कंक्रीट की मजबूत टर्मिनल कुछ सेकंड भी दानवी लहर को नहीं झेल सकी और पल भर में ध्वस्त हो गई। इस दौरान वहां खड़ी बसें सैलाब में ऐसी बहती दिखाई दी, जैसे प्लास्टिक के खिलौने बह रहे हो। सैलाब आने से पहले जान बचाने के लिए जो लोग वहां से निकल रहे थे। शायद वे भी इस तबाही की चपेट में आ गए, क्योंकि, कुछ सेकंड के अंदर सबकुछ तबाह हो गया और टर्मिनल का वो हिस्सा नदी के दायरे में आ गया। ऐसे में वहां मौजूद लोगों का क्या हाल हुआ होगा। इस बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है।

रसुवा में नौ बैंकों की शाखाएं बहीं, 26 कर्मचारी लापता

रसुवा में आई भीषण बाढ़ में नौ बैंकों की शाखाएं बह गईं। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन के मुताबिक, इनमें काम करने वाले 26 कर्मचारियों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। टेलीफोन सेवाएं ठप होने और बिजली नहीं होने के कारण राहत एवं बचाव टीमों को भी संपर्क करने में परेशानी हो रही है। वहीं चीन ने तिब्बत के ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर मलबे के बहाव के बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। इसके लिए 574 बचावकर्मियों को प्रभावित इलाके में भेजा गया है।

अचानक बाढ़ आने की वजह

भूकंप से टूटा ल्हेन्दे नदी का अवरोध

वैज्ञानिक इस हिमस्खलन के पीछे उसी समय क्षेत्र में आए भूकंप को भी एक संभावित ट्रिगर मान रहे हैं। अमरीकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह लगभग 8:37 बजे गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसका असर यह हुआ कि ल्हेन्दे नदी अचानक हिमस्खलन से अवरुद्ध हो गई। यही नदी तिब्बत में आगे बढक़र नेपाल में त्रिशूली नदी में मिल जाती है और भोटेकोशी कहलाती है। राष्ट्रीय विपदा जोखिम न्यूनीकरण और व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) को भी चीनी सूत्रों से यही प्रारंभिक जानकारी मिली है।

हिमताल विस्फोट की आशंका

इस क्षेत्र में कई बड़े हिमताल मौजूद हैं, इसलिए वैज्ञानिक इस बात की भी गहन जांच कर रहे हैं कि क्या हिमस्खलन के साथ-साथ कोई हिमताल भी फटा है। जल और मौसम विज्ञान विभाग (डीएचएम) का मानना है कि नेपाल या तिब्बत के किसी क्षेत्र में हिमताल विस्फोट की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि पिछले साल (8 जुलाई, 2025) भी इसी ल्हेन्दे नदी में ऐसी ही अचानक बाढ़ आई थी, जिसका मुख्य कारण उपग्रह के चित्रों के विश्लेषण से हिमताल विस्फोट ही पाया गया था।

कोई सामान्य मानसून बाढ़ नहीं

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई सामान्य मानसून बाढ़ नहीं थी। जल और मौसम विज्ञान विभाग के विशेष अपडेट के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार को इस पूरे क्षेत्र में कोई भारी बारिश नहीं हुई थी। बारिश न होने के बावजूद अचानक पानी का इतना बड़ा रेला आना इस बात की पुष्टि करता है कि यह पानी किसी प्राकृतिक अवरोध के अचानक टूटने से ही आया है।

दुनिया की सबसे खतरनाक बाढ़ें

नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने एक बार फिर याद दिलाया कि बाढ़ सिर्फ पानी का बढऩा नहीं, बल्कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस्तियों, सडक़ों और पुलों को तबाह करने वाली आपदा भी हो सकती है। इतिहास में कुछ बाढ़ ऐसी भी रही हैं, जिनके सामने नेपाल की मौजूदा त्रासदी का पैमाना छोटा नजर आता है। इन घटनाओं में लाखों लोगों की जान गई, पूरे शहर-गांव तबाह हो गए और कई इलाकों को सालों तक इसका असर झेलना पड़ा…

1887 की येलो रिवर बाढ़ (चीन): येलो रिवर यानी पीली नदी के तटबंध टूटने के बाद पानी ने विशाल क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 9.3 लाख लोगों की मौत हुई, जबकि कुछ अनुमानों में यह संख्या 20 लाख तक बताई जाती है।

1931 की चीन की बाढ़ : यांग्त्जी, हुआई और पीली नदी समेत कई नदियों में भयंकर बाढ़ आई। लगातार बारिश और पहले से मौजूद खराब परिस्थितियों ने आपदा को और बड़ा बना दिया। मौतों का आंकड़ा अलग-अलग स्रोतों में काफी अलग है, क्योंकि बाढ़ के साथ अकाल और बीमारियों से हुई मौतों को भी कई अनुमानों में शामिल किया गया है। लगभग 4.22 लाख से 40 लाख तक मौत का अनुमान।

1935 की यांग्त्जी बाढ़, (चीन) : यांग्त्जी नदी क्षेत्र में आई इस बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। बाढ़ के बाद बीमारी और भोजन की कमी ने हालात को और गंभीर बना दिया। उपलब्ध ऐतिहासिक आंकड़ों में करीब 1.45 लाख मौतों का उल्लेख मिलता है।

1938 की येलो रिवर बाढ़ (चीन) : यह बाढ़ सामान्य प्राकृतिक आपदा नहीं थी। चीन-जापान युद्ध के दौरान चीनी सैनिकों ने जापानी सेना को रोकने के लिए येलो रिवर के तटबंध तोड़ दिए थे। इसके बाद बड़े इलाके में पानी फैल गया। अलग-अलग स्रोतों में मौत का अनुमान अलग है और कई आंकड़े अकाल तथा बीमारी से हुई मौतों को भी जोड़ते हैं। लगभग पांच लाख से सात लाख मौत का अनुमान था।

1974 की बांग्लादेश बाढ़: मानसून की भारी बारिश से बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर बाढ़ आई। अलग-अलग स्रोतों में मौत का आंकड़ा काफी अलग मिलता है। इसी वजह से इस आपदा की मानवीय कीमत का अनुमान एक निश्चित संख्या में बताना मुश्किल है। मौत का आंकड़ा लगभग 27,000 से 1.5 लाख तक बताया जाता है।

1975 बनकियाओ डैम आपदा (चीन) : टाइफून नीना के कारण अत्यधिक बारिश हुई और हेनान प्रांत में बनकियाओ बांध समेत कई बांधों की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। बाढ़ के साथ बाद में फैली बीमारियों ने भी बड़ी संख्या में लोगों की जान ली। अनुमानित मौत का आंकड़ा करीब 2.3 लाख माना जाता है।


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