नेपाल में प्रलयकारी बाढ़; सैकड़ों लापता, 95 शव मिले, अचानक आई तबाही ने रास्ते में आने वाले गांव-पुल-सडक़ें उजाड़ीं

By: Aug 27th, 2026 12:01 am

तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने से भोटेकोशी नदी में अचानक आई तबाही ने रास्ते में आने वाले गांव-पुल-सडक़ें उजाड़ीं

एजेंसियां — काठमांडू

पड़ोसी देश नेपाल के उत्तरी हिस्से में स्थित रसुवा जिला में बुधवार सुबह आई विनाशकारी बाढ़ से पल भर में नदियों पर बने पुल और मकान ध्वस्त हो गए और बाढ़ में समा गए। इस विध्वंसकारी बाढ़ की वजह से सैकड़ों लोग लापता हैं। खबर लिखे जाने तक 95 लोगों के शव मिल चुके थे। नेपाल टूरिज़्म बोर्ड के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाके से कम से कम 384 विदेशी यात्री लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 142 भारतीय नागरिक शामिल हैं। लापता भारतीयों में ज्यादातर तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे। इसके अलावा, 17 मलेशियाई, 12 ब्रिटिश, चार दक्षिण अफ्रीकी, आठ दक्षिण कोरियाई, तीन अमरीकी, एक आस्ट्रेलियाई और एक डच नागरिक शामिल हैं। 111 अन्य लापता लोगों के नागरिकता की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है। यह भयानक सैलाब चीन के तिब्बत क्षेत्र की तरफ से भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढऩे की वजह से आया है। आशंका जताई जा रही है कि नेपाल के ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में कोई ग्लेशियर झील फटने के कारण यह घटना अचानक हुई है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर कोई भारी बारिश नहीं हुई थी। इस विध्वंसकारी बाढ़ के कई वीडियो सामने आ रहे हैं। उनमें दिख रहा है कि नेपाल की रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने प्रलय मचा रखा है। नेपाली मीडिया की खबरों के अनुसार, बाढ़ का पानी सीमा के तिब्बती हिस्से से आया, जिससे नेपाल में भारी नुकसान हुआ और कई गांव बह गए। अधिकारियों ने बताया कि रसुवा जिला में नेपाल पुलिस के कम से कम 80 जवान लापता हैं।

आम्र्ड पुलिस फ़ोर्स ने भी कहा है कि उसके 44 जवान लापता हैं। रसुवा में आई भीषण बाढ़ में नौ बैंकों की शाखाएं बह गईं। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन के मुताबिक, इनमें काम करने वाले 26 कर्मचारियों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। बाढ़ से नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक रसुवा और नुवाकोट जिलों में कम से कम 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। इनमें चालू और निर्माणाधीन दोनों परियोजनाएं शामिल हैं। लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना को भी भारी नुकसान की खबर है। यहां 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ का असर रसुवा से नुवाकोट, धाडिंग होते हुए चितवन तक देखा गया। रसुवा में टिमुरे, स्याफ्रुबेसी, हाकुबेसी, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी बस्ती और बेत्रावती समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुईं। बाढ़ धादिंग के गल्छी तक पहुंची और आगे मुग्लिन में भी तबाही मचाई।

उधर, नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर प्रधानमंत्री मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है और हर मानवीय मदद देने के लिए तैयार है। उधर, नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत तक पहुंचने की आशंका है। इसे देखते हुए यूपी के दो और बिहार के आठ जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। इनमें पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर शामिल हैं। कोसी, बागमती और गंडक नदी के कैचमेंट इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं। जरूरत पडऩे पर नाव, शेल्टर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था भी की जाएगी।

कैलाश मानसरोवर की यात्रा को गए 142 भारतीय नागरिकों सहित 384 विदेशी लापता

ल्हेंदे नदी में कूदा ‘हिम राक्षस’ और मच गई तबाही

वैज्ञानिकों के मुताबिक नेपाल-चीन बॉर्डर के पास नेपाल की तरफ से एक विशालकाय बर्फ का टीला खिसक कर सीधे ल्हेंदे नदी में जा गिरा। इस भारी-भरकम बर्फीले मलबे ने एक प्राकृतिक बांध की तरह काम किया और नदी के पानी को एक जगह रोक दिया। बाद में यह बर्फीला बांध अचानक टूट गया और पानी उफान पर आ गया। इसके बाद निचले इलाकों की तरफ पानी इतनी तेज रफ्तार और रौद्र रूप के साथ भागा कि भोटेकोशी नदी में देखते ही देखते भयंकर उफान आ गया। इसके अलावा तिब्बत बॉर्डर पर आए 4.4 तीव्रता के भूकंप और ग्लेशियर झील फटने को भी इसकी वजह माना जा रहा है।


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