गुग्गा जाहरवीर की गाथा गाने गांव-गांव निकलीं मंडलियां
रक्षाबंधन से गुग्गा नवमी तक नौ दिन तक घर-घर जाकर करेंगी गुग्गा गायन
निजी संवाददाता – चांदपुर
बिलासपुर जिला की बामटा पंचायत क्षेत्र में गुग्गा जाहरवीर की गाथा का गायन शुरू हो गया है। गुग्गा मंडलियां नंगे पैर गांव-गांव पहुंचकर घर-घर गुग्गा जाहरवीर की गाथा का गायन कर रही हैं। धार्मिक आस्था और लोक परंपरा से जुड़ी इस अनूठी परंपरा को लेकर ग्रामीणों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। नोग टिक्कर की सरवन एंड पार्टी बध्यात गांव पहुंची, जहां मंडली के सदस्यों ने घर-घर जाकर गुग्गा जाहरवीर की गाथा का गायन किया। करीब छह-सात सदस्यों वाली यह टोली नंगे पैर चलकर ग्रामीणों के घर पहुंचती है और पारंपरिक तरीके से गुग्गा जाहरवीर की वीरगाथा सुनाती है। इस दौरान ग्रामीण श्रद्धापूर्वक गुग्गा जाहरवीर का स्मरण करते हुए मंडली का स्वागत करते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अनाज तथा धनराशि अर्पित करते हैं। मंडली के मुंडिया सरवन कुमार ने बताया कि उनकी पार्टी पिछले करीब 25 वर्षों से इस परंपरा को निभाती आ रही है। रक्षा बंधन से लेकर गुग्गा नवमी तक नौ दिनों के दौरान मंडली आसपास की पांच-छह पंचायतों के विभिन्न गांवों में जाकर गुग्गा जाहरवीर की गाथा का गायन करती है। उन्होंने कहा कि यह केवल गायन नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन लोक आस्था और संस्कृति से जुड़ी परंपरा है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी उनका उद्देश्य है।
गुग्गा नवमी को होगा परंपरा का समापन
रक्षा बंधन से शुरू होने वाली इस धार्मिक यात्रा का समापन गुगा नवमी के दिन किया जाता है। उस दिन क्षेत्र की सभी गुग्गा मंडलियां एकत्रित होकर गुग्गा मंदिर पहुंचती हैं। यहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गुग्गा जाहरवीर की आरती और गाथा का सामूहिक गायन
किया जाता है।
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