1981 में अलॉट हुई जमीन में फर्जीबाड़ा, अधिकारियों से मिलीभगत कर करोड़ों की खरीद-फरोख्त करने वाला गिरफ्तार
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — धर्मशाला
हिमाचल प्रदेश में सक्रिय भू-माफिया के खिलाफ प्रदेश सरकार का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। कांगड़ा जिले के धर्मशाला में 1981 में अलॉट हुई जमीन की फर्जी खरीद-फरोख्त के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी नेकराम निवासी धर्मशाला को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पांच तारीख तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के राजस्व विभाग और अवैध रूप से जमीन के कारोबार में लिप्त लोगों में भारी हडक़ंप मच गया है। मामले की जानकारी देते हुए सूत्रों ने बताया कि यह पूरा धंधा धर्मशाला के एक पोश एरिया मोहली की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है, जो मूल रूप से वर्ष 1981 में अलॉट की गई थी। आरोप है कि नेकराम ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ कथित तौर पर गहरी मिलीभगत करके इस जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इसकी खरीद-फरोख्त कर डाली।
हैरानी की बात यह है कि जालसाजी से हथियाई गई यह जमीन आगे कई अन्य लोगों को भी बेच दी गई। मामले की भनक लगने पर बिजिलेंस ने इसी साल जनवरी] 2026 में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े फोर्जरी का मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू की थी। बिजिलेंस की इस सख्त कार्रवाई के बाद अब मामले की कई परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। जांच में राजस्व अधिकारियों के साथ आरोपी की साठगांठ के अहम सुराग मिले हैं। जांच के आधार पर जल्द ही इस मामले में एक और बड़ी गिरफ्तारी हो सकती है। इसके अलावा, मामले की जड़ें इतनी गहरी बताई जा रही हैं कि आने वाले दिनों में कई अन्य फर्जी रजिस्ट्रियों का भी बड़ा खुलासा हो सकता है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, ऊना सहित विभिन्न जिलों में जमीनों को लेकर भू-माफिया बड़े स्तर पर सक्रिय रहा है। आम लोगों की जमीनों पर कब्जे और फर्जी दस्तावेजों से खरीद-फरोख्त के बढ़ते मामलों को देखते हुए हाल ही में प्रदेश सरकार ने ऐसे माफियाओं पर नकेल कसने के सख्त निर्देश दिए थे। सरकार की इसी सख्ती का नतीजा है कि अब प्रदेश भर में जमीन घोटालों के ऐसे बड़े खुलासे हो रहे हैं।
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