अमरीका ने अंतरिक्ष में तैनात कर रखे हैं हथियार, ट्रंप के देश ने पहली बार किया स्वीकार

By: Sep 16th, 2026 12:08 am

ट्रंप के देश ने पहली बार किया स्वीकार, रूस और चीन पर भी स्पेस में जंग की तैयारी करने का लगाया आरोप

एजेंसियां — वाशिंगटन डीसी

अमरीका ने पहली बार माना है कि उसने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर रखे हैं। अमरीकी वायुसेना के सचिव ट्रॉय मिंक ने यह खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि अमरीका के पास ऑर्बिट में ऐसे हथियार हैं, जिनका इस्तेमाल जरूरत पडऩे पर अमरीकी सैनिकों को दुश्मन के हमले से बचाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि अमरीकी अधिकारी ने यह नहीं कहा कि ये हथियार आखिर किस तरह के हैं, कितने हैं और इन्हें कब अंतरिक्ष में भेजा गया था। अमरीका का यह खुलासा ऐसे समय हुआ है, जब अमरीका, रूस और चीन के बीच अंतरिक्ष में अपनी ताकत बढ़ाने की होड़ चल रही है। इससे अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ और तेज होने की आशंका भी बढ़ गई है। अमरीका लंबे समय से रूस और चीन की बढ़ती अंतरिक्ष सैन्य ताकत को लेकर चिंता जताता रहा है। आज के युद्ध में सेटेलाइट बहुत जरूरी हो गए हैं। सेनाएं इनका इस्तेमाल आपस में संपर्क करने, रास्ता पता करने, खुफिया जानकारी जुटाने और मिसाइलों पर नजर रखने जैसे कामों में करती हैं। ऐसे में अगर किसी देश के सेटेलाइट पर हमला होता है, तो उसकी सैन्य ताकत कमजोर हो सकती है।

इसलिए बड़ी सैन्य ताकतें अब सिर्फ नए सेटेलाइट बनाने पर ही ध्यान नहीं दे रही हैं। वे अपने सेटेलाइट को दुश्मन के हमले से बचाने और जरूरत पडऩे पर दूसरे देश के अंतरिक्ष सिस्टम को रोकने की क्षमता भी विकसित कर रही हैं। अमरीकी स्पेस फोर्स का कहना है कि रूस अंतरिक्ष को भी युद्ध का हिस्सा मानता है। यानी भविष्य में अगर रूस का किसी देश से बड़ा युद्ध होता है, तो वह अंतरिक्ष में मौजूद सेटेलाइट और दूसरी तकनीक का इस्तेमाल भी कर सकता है। अमरीकी अधिकारियों ने रूस के कुछ सेटेलाइट को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि रूस ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है, जिससे जरूरत पडऩे पर दूसरे देशों के सेटेलाइट को नुकसान पहुंचाया जा सके और अपने सेटेलाइट को बचाया जा सके।

अमरीका का कहना है कि चीन भी अंतरिक्ष में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। चीन अपनी सेना को आधुनिक बनाने के तहत ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिसका इस्तेमाल अंतरिक्ष में मौजूद सेटेलाइट और दूसरे सिस्टम को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। अमरीका चीन की बढ़ती सैन्य और अंतरिक्ष ताकत को अपने लिए बड़ी चुनौती मानता है। इसी माहौल में अमरीका का यह मानना कि उसने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर रखे हैं, यह दिखाता है कि वह भी अंतरिक्ष में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। जरूरत पडऩे पर इन हथियारों का इस्तेमाल दुश्मन के हमले से अमरीकी सैनिकों और उसके अंतरिक्ष सिस्टम को बचाने के लिए किया जा सकता है।

अंतरिक्ष में युद्ध हुआ, तो असर धरती पर भी पड़ेगा

अगर अंतरिक्ष में अमरीका, रूस या चीन के बीच सैन्य टकराव होता है, तो उसका असर सिर्फ सेनाओं और सेटेलाइट तक सीमित नहीं रहेगा। आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो सकती है। मौसम का पता लगाने, प्राकृतिक आपदाओं पर नजर रखने, रास्ता खोजने और दूर-दूर तक संपर्क बनाए रखने जैसे कई काम सेटेलाइट की मदद से होते हैं। जीपीएस जैसी सेवाओं से विमान, जहाज और ट्रक अपना रास्ता तय करते हैं। बैंकिंग और दूसरे वित्तीय कामों में भी सटीक समय और कम्युनिकेशन के लिए सेटेलाइट से मिलने वाली सेवाओं की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर बड़ी संख्या में सेटेलाइट खराब हो जाते हैं या उन्हें नुकसान पहुंचता है, तो मोबाइल और दूसरे कम्युनिकेशन नेटवर्क, नेविगेशन, मौसम की जानकारी और कई जरूरी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। अगर अंतरिक्ष में बड़ा टकराव होता है, तो उसका असर दुनिया भर के आम लोगों तक पहुंच सकता है।


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