संकट में हिमाचल का खूबसूरत परिंदा, पहाड़ की दुर्लभ विरासत बचाएगा वन्य प्राणी विभाग

By: Sep 17th, 2026 4:23 pm

अजय शर्मा—शिमला

हिमाचल में दुर्लभ और संकटग्रस्त चीर फिजेंट के संरक्षण के लिए वन विभाग नई योजना बनाने जा रहा है। इसके लिए विभाग का वन्य प्राणी विंग वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की मदद लेगा। प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए विभाग कैंपा के तहत राज्य को मिलने वाली राशि खर्च करेगा। वन्य प्राणी विंग ने योजना को लेकर कार्य शुरू कर दिया है। खबर की पुष्टि प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्य प्राणी विंग आलोक प्रेम नागर ने की है। उल्लेखनीय है कि चीर फिजेंट के संरक्षण को लेकर वन्य प्राणी विंग की और से कवायद चलाई गई है। इसके तहत शिमला के चायल स्थित केंद्र में भी कार्य किया जा रहा है, लेकिन अब प्रदेश में चीर फीजेंट के संरक्षण की दिशा में चल रहे कार्य को गति प्रदान करने के लिए वन्य प्राणी विंग नइ प्रोजेक्ट पर काम करने की तैयारी में है। इसके लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर योजना वन्य प्राणी विंग बनाएगा।

विभाग का कहना है कि चायल के अलावा सराहन क्षेत्र में भी चीर फीजेंट के संरक्षण को लेकर कार्य किया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी। वन्य प्राणी विंग का मानना है कि चीर फीजेंट के अंडों से बच्चे निकलने में समस्या आ रही है। नतीजतन इस समस्या का तोड़ निकालने के लिए कार्य किया जाएगा, जिससे कि राज्य में इनकी संख्या को भी बढ़ाया जा सके। वन्य प्राणी विंग का कहना है कि इस दुर्लभ व संकटग्रस्त पक्षी के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है। लिहाजा यही वजह है कि वन्य प्राणी विंग वाइल्ड लाइफ इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर इसके लिए आगे कदम बढ़ाने जा रहा है।

खुले में छोड़े जाएंगे 30 परिंदे

अहम है कि वन्य प्राणी विंग कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए इनका कुनबा बढ़ा रहा है, वहीं वन्य प्राणी विंग चायल क्षेत्र में अब 30 चीर फीजेंट को खुले वातावरण में छोडऩे की तैयारी में भी है। इन पक्षियों को खुले वातावरण में छोडऩे के उपरांत वन्य प्राणी विंग की टीम इनके व्यवहार और गतिविधियों पर नजर रखेगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि कैप्टिव वातावरण से निकलने के बाद चीर फीजेंट जंगल के प्राकृतिक माहौल में किस तरह खुद को ढालते हैं। साथ ही इनके स्वास्थ्य और जीवित रहने की क्षमता का भी आकलन करने के अलावा विशेषज्ञों की निगरानी में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि जरूरत पडऩे पर पक्षियों के लिए आवश्यक संरक्षण उपाय किए जा सकें।

नेपाल-पाकिस्तान में आवास

चीर फीजेंट हिमालयी क्षेत्र का दुर्लभ और संरक्षित पक्षी है। जंगलों में बदलाव, प्राकृतिक आवास के कम होने और अवैध शिकार जैसी वजहों से इसकी संख्या प्रभावित हुई है। यह हिमाचल के अलावा उत्तराखंड, नेपाल और पाकिस्तान के हिमालयी क्षेत्रों में भी पाया जाता है। यह पक्षी सामान्य तौर पर समुद्र तल से 1500 से 3000 मीटर की ऊंचाई वाले पहाड़ी और वन क्षेत्रों में रहना पसंद करता है। इसके संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना भी जरूरी माना जाता है।

लंगी पूंछ और भूरे रंग के पंख

चीर फीजेंट के पंख भूरे रंग के होते हैं। आंखों के आसपास गुलाबी-लाल रंग का घेरा और लंबी पूंछ इसकी प्रमुख पहचान है। उधर, वन्य प्राणी विंग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल आलोक प्रेम नागर का कहना है कि चीर फीजेंट के संरक्षण के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर एक योजना बनाएंगे। इसके लिए स्टेट कैंपा से राशि का प्रबंध किया जाएगा।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App