एक बिजली पोल के उपयोग पर भी देना होगा 50 खंभों का किराया
वरिष्ठ संवाददाता—शिमला
प्रदेश में बिजली बोर्ड के पोल का इस्तेमाल ओएफसी, केवल टीवी और ब्रॉडबैंड सहित अन्य सेवाएं से जुड़ी केबल बिछाने के लिए सेवा प्रदाता एक विद्युत मंडल में कम से कम 50 खंभों का किराया देना होगा। बिजली बोर्ड की नई नीति के तहत किसी सेवा प्रदाता को यदि 50 से कम खंभों की जरूरत है, तब भी उसे कम से कम 50 खंभों के इस्तेमाल का किराया चुकाना होगा। इससे अधिक खंभों का इस्तेमाल करने पर वास्तविक संख्या के अनुसार किराया देना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली बोर्ड के खंभों के इस्तेमाल के लिए एक समान नियम लागू करना है। नई व्यवस्था के तहत बिजली के खंभों पर केबल डालने के लिए संबंधित वरिष्ठ अधिशासी अभियंता से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए सेवा प्रदाता को उन खंभों का पूरा विवरण देना होगा, जिनका वह इस्तेमाल करना चाहता है। साथ ही प्रत्येक प्रस्तावित खंभे की जीपीएस आधारित जानकारी भी देनी होगी। इससे बिजली बोर्ड के अधिकारियों को खंभों की सही पहचान करने और उनके इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखने में मदद मिलेगी।
बोर्ड की नई नीति में स्पष्ट किया गया है कि खंभों के इस्तेमाल का पांच साल का किराया अग्रिम जमा करवाना अनिवार्य होगा। यदि सेवा प्रदाता या उपयोगकर्ता समय पर किराया जमा नहीं करवाता है, तो उस पर जुर्माना लगाने के साथ अनुबंध भी समाप्त किया जा सकता है। इसके बाद बोर्ड खंभों पर बिछाई गई केबल और उससे जुड़ी सामग्री को हटाकर अपने कब्जे में ले सकेगा। संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का भी प्रावधान है। नीति के अनुसार किराया जमा करवाने में देरी होने पर प्रत्येक महीने के लिए सालाना किराये का पांच प्रतिशत जुर्माना देना होगा। यह व्यवस्था अधिकतम तीन महीने की देरी तक लागू रहेगी। इसके बाद भी भुगतान नहीं होने पर बोर्ड संबंधित सेवा प्रदाता का अनुबंध समाप्त कर सकता है। ऐसी स्थिति में कंपनी की ओर से जमा करवाई गई परफॉर्मेंस सिक्योरिटी यानी कार्य निष्पादन प्रतिभूति, अन्य सुरक्षा राशि और अग्रिम भुगतान, यदि किया गया हो, जब्त किया जा सकता है। नई नीति में बिजली बोर्ड के प्रचार-प्रसार से जुड़ी शर्त भी रखी गई है। इसके तहत केवल उन सेवा प्रदाताओं को प्रतिदिन प्राइम टाइम के दौरान 60 सेकंड तक बिजली बोर्ड के विज्ञापन या संदेश मुफ्त प्रसारित करने होंगे, जो केबल टीवी सिग्नल प्रसारित करते हैं। यानी यह शर्त सभी इंटरनेट और दूरसंचार कंपनियों पर लागू नहीं होगी। इसका पालन केबल टीवी सिग्नल प्रसारित करने वाले ऑपरेटरों को करना होगा।
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