मतपत्रों से हुए चुनाव ने खोली पोल, फिर क्यों वोट चोरी का शोर? परमार का कांग्रेस पर तीखा वार
भाजपा ने धर्मशाला से किया लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ का शंखनाद
धर्मशाला। धर्मशाला से उठी लोकतंत्र की आवाज अब प्रदेश के प्रत्येक कोने तक पहुंचेगी। भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के माध्यम से कांग्रेस सरकार के विरुद्ध अपने राजनीतिक संघर्ष का शंखनाद कर दिया है, वहीं 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस द्वारा आयोजित की जा रही ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली ने एक बार फिर कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति, उसके बयानों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह बात भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने कही।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक आचरण और चुनावी परिणामों का भी अवलोकन करना चाहिए। जब चुनाव परिणाम अनुकूल आते हैं तो निर्वाचन प्रक्रिया पर मौन और जब परिणाम प्रतिकूल आते हैं तो मतदाता सूची, निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े करना आखिर किस प्रकार की राजनीतिक दृष्टि है? लोकतंत्र में चुनाव परिणामों को स्वीकार करना और मतदाताओं के निर्णय का सम्मान करना प्रत्येक राजनीतिक दल का दायित्व है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नाम पर महारैली करने जा रही है। पार्टी नेताओं द्वारा लोगों से बेफिक्र होकर आने, पुलिस अथवा लाठियों से नहीं डरने और एकता तथा सच्चाई के साथ खड़े होने जैसे वक्तव्य दिए जा रहे हैं, परंतु कांग्रेस नेतृत्व को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता को आंदोलित करने वाले नारों से अधिक महत्वपूर्ण तथ्यों, प्रमाणों और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार आचरण होता है। यदि किसी निर्वाचन प्रक्रिया पर वास्तविक आपत्ति है तो उसे संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से प्रमाण सहित प्रस्तुत किया जाना चाहिए। केवल बड़े-बड़े नारों और जनसभाओं से तथ्यों का स्थान नहीं लिया जा सकता।
मतपत्रों से हुए चुनाव ने खोली कांग्रेस की पोल

विपिन परमार ने कहा कि कांग्रेस जिस मतपत्र प्रणाली को लेकर देशभर में राजनीतिक विमर्श खड़ा कर रही है, उसी संदर्भ में हाल ही में चार राज्यों में हुए विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों के परिणामों पर भी चर्चा होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की कुल 28 निर्वाचन क्षेत्रों में 23 अक्टूबर को मतपत्रों के माध्यम से मतदान हुआ था। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में होने के बावजूद चारों सीटों पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। भाजपा और जद(एस) गठबंधन ने सभी चार सीटों पर विजय प्राप्त की। बिहार में भी दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य को जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी से पराजय का सामना करना पड़ा। उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला रहा, जबकि महाराष्ट्र में भी विभिन्न दलों के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। श्री परमार ने कहा कि इन परिणामों से कम से कम इतना स्पष्ट होता है कि मतपत्रों से होने वाले चुनावों में भी कांग्रेस को राजनीतिक चुनौतियों और पराजयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व को निर्वाचन प्रक्रिया पर लगाए जा रहे आरोपों के साथ-साथ अपने प्रत्याशियों के प्रदर्शन और संगठन की स्थिति पर भी आत्ममंथन करना चाहिए। मतपत्र हो अथवा इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन, प्रत्येक चुनाव में मतदाता का निर्णय सर्वोपरि है।
हिमाचल में दस गारंटियों का हिसाब देने से क्यों बच रही कांग्रेस?

भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति में कथनी और करनी का अंतर केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, हिमाचल प्रदेश में भी दिखाई देता है। प्रदेश की जनता से दस गारंटियों के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए गए थे। महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये, युवाओं को रोजगार, कर्मचारियों के हितों की रक्षा, किसानों और बागवानों को राहत तथा आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने के वचन दिए गए थे। आज प्रदेश की जनता इन वादों का हिसाब मांग रही है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस के नेता रामलीला मैदान में लोकतंत्र बचाने के नारे लगाने से पहले हिमाचल प्रदेश की जनता को यह बताने का साहस क्यों नहीं दिखाते कि चुनाव के समय किए गए वादों में से कितने पूरी तरह निभाए गए हैं? प्रदेश की आर्थिक स्थिति, बढ़ता कर्ज, विकास कार्यों की गति, कर्मचारियों की लंबित मांगें, युवाओं के रोजगार और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर सरकार का स्पष्ट जवाब कहां है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतकर सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह रहने की व्यवस्था है। विपक्ष का दायित्व सवाल उठाना है और सरकार का दायित्व उन सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना है। भाजपा इसी संवैधानिक दायित्व के अंतर्गत प्रदेश की जनता से जुड़े विषयों को निरंतर उठा रही है।
धर्मशाला से शुरू हुआ संघर्ष अब प्रदेशव्यापी जनसंवाद का रूप लेगा
विपिन सिंह परमार ने कहा कि आज धर्मशाला में भाजपा ने जो शंखनाद किया है, वह किसी एक दिन अथवा एक स्थान तक सीमित रहने वाला कार्यक्रम नहीं है। प्रदेश के प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच संवाद किया जाएगा। कांग्रेस सरकार के चुनावी वादों, नीतियों, निर्णयों और कार्यप्रणाली पर तथ्यात्मक सवाल उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश की जनता को सरकार के कार्यकाल का पूरा लेखा-जोखा जानने का अधिकार है। भाजपा जनता के समक्ष प्रदेश सरकार के वादों और वास्तविक स्थिति को रखेगी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछने वाले विपक्ष को राजनीतिक नारों से चुप नहीं कराया जा सकता। श्री परमार ने कहा कि कांग्रेस चाहे दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करे अथवा देश के किसी अन्य हिस्से में राजनीतिक आयोजन करे, उसे जनता के सवालों का जवाब देना ही होगा। लोकतंत्र में नारे लगाने का अधिकार जितना सत्ता पक्ष को है, उतना ही सरकार से हिसाब मांगने का अधिकार विपक्ष और आम नागरिक को भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मशाला से उठी आवाज अब प्रदेशव्यापी जनसंवाद का विषय बनेगी। जनता के सवाल उठते रहेंगे, लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अंतर्गत संघर्ष जारी रहेगा और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता रहेगा।
ये नेता रहे मौजूद
इस दौरान कांगड़ा-चंबा लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, पूर्व मंत्री व धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा, कांगड़ा के विधायक पवन काजल, विधायक ठाकुर रणवीर सिंह निक्का, पूर्व मंत्री सरवीन चौधरी, पूर्व विधायक अरुण कुमार मेहरा कूका, पूर्व विधायक विशाल नैहरिया, पूर्व विधायक मुल्क राज प्रेमी, पूर्व विधायक रवि धीमान, पूर्व विधायक ठाकुर अर्जुन सिंह, पूर्व विधायक रीता धीमान, भाजपा वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर, भाजपा प्रवक्ता संजय शर्मा, विनय शर्मा, संजय गुलेरिया, पंकज जम्वाल, विनोद ठाकुर, संजीव शर्मा, विश्व चक्षु, भाजपा संगठनात्मक तीनों ज़िलों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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