शादी के लिए दुल्हन क्यों डालती है चूड़ा और कलीरा

By: Feb 18th, 2018 12:05 am

शादी किसी भी कपल की लाइफ  का सबसे खूबसूरत पल होता है। शादी से जहां दो दिल मिलते हैं, वहीं दो परिवारों का मेल होता है। रिश्तेदारों के आशीर्वाद से दूल्हा-दुल्हन अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं। भारतीय शादी में कई तरह की रस्में की जाती हैं। पंजाबी शादी में चूड़ा और कलीरे का बहुत महत्त्व है। शादी के दिन दुल्हन के घर पर चूड़ा और कलीरे की रस्म की जाती है। आज हम आपको बताते हैं कि चूड़ा और कलीरे का क्या महत्त्व होता है।

चूड़ा: एक पंजाबी शादी की मीठी और कभी न भूलने वाली यादों के अलावा सबसे स्पेशल है चूड़े की रस्म। चूड़े को दुल्हन के मामा-मामी लेकर आते हैं। यह 21 चूडि़यों से बना होता है, जोकि लाल और सफेद रंग की होती हैं। आजकल तो कई तरह के चूड़े मार्केट में आए हुए हैं। आजकल तो लड़कियां इस पर अपना और अपने पति का नाम लिखवाती हैं। चूड़ा समारोह में हवन किया जाता है इसे पहले चूड़े को कच्ची लस्सी में डाल दिया जाता है। सभी रिश्तेदार चूड़े को हाथ लगाकर अपना आशीर्वाद देते हैं। इसके बाद इसे लड़की को पहना दिया जाता है और लड़की के हाथों को सफेद कपड़े के साथ बांध दिया जाता है। दुल्हन अपनी शादी तक चूड़े को देख नहीं सकती। नई नवेली दुल्हन की पहचान चूड़ा से ही होती है।

कलीरे

चूड़े के साथ अंब्रेला-शेप्ड हैंगिंग्स पहना जाता है, जिसे कलीरे कहा जाता है। दुल्हन की बहनें और दोस्त इसे बांधते हैं । बहनें ,रिश्तेदार और दोस्त कलीरे बांध कर दुल्हन को आशीर्वाद देते हैं कि वह जिंदगी में हमेशा खुश रहे। मार्केट में कलीरे कई तरह के मिलते हैं। लड़की चूड़ा और कलीरे पहनकर कुवांरी लड़कियों के सिर पर छनकाती है। माना जाता है कि जिस लड़की के सिर पर कलीरा गिर, तो अगली शादी उसी की होगी। शादी के अगले दिन दुल्हन का एक कलीरा उतार कर मंदिर में चढ़ा दिया जाता है और बाकी कलीरे लड़की अपने पास रखती है। कहीं कहीं तो यह रिवाज है कि कलीरे उसकी नंनदों को बांट दिए जाते हैं।


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