वायु प्रदूषण के खिलाफ जंग

अनुज कुमार आचार्य

बैजनाथ

भारत में वायु प्रदूषण मौत की बड़ी वजह बनता जा रहा है। 2017 में ही भारत में तकरीबन 12 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई है। अमरीका के हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीच्यूट की वायु प्रदूषण पर एक वैश्विक रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019’ में भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के बारे में चेताया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण की वजह से 2017 में स्ट्रोक, मधुमेह, दिल का दौरा, फेफड़े के कैंसर या फेफड़े की पुरानी बीमारियों से पूरी दुनिया में करीब 50 लाख लोगों की मौत हुई है। भारत में अभी भी 60 फीसदी लोग सोलिड फ्यूल से खाना बना रहे हैं। इसकी वजह से घर के भीतर प्रदूषण बढ़ रहा है। हैल्थ इफेक्ट्स इंस्टीच्यूट की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने प्रदूषण से निपटने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, घरेलू एलपीजी कार्यक्रम, स्वच्छ वाहन मानक और नया राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम यदि सही तरह से संचालित किए जाएं, तो सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। संयुक्त राष्ट्र संघ पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा इस वर्ष 2019 में विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘वायु प्रदूषण के खिलाफ जंग’ रखा गया है। आज दुनिया भर में पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा, ताकि पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति सामान्य मानव को जागरूक किया जा सके। आज दुनिया भर में 92 फीसदी लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा नसीब नहीं होती है। ऐसा अनुमान है कि जमीनी स्तर के ओजोन प्रदूषण से वर्ष 2030 तक फसलों के उत्पादन में 26 फीसदी की कमी आएगी।  डीजल इंजन, कूड़े के जलने और गंदे स्टोव से होने वाला काला कार्बन खतरनाक है और अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक है। यदि हम इन प्रदूषकों को भी काबू में कर लें, तो अगले कुछ दशकों में हम ग्लोबल वार्मिंग को .5 डिग्री सेंटीग्रेड तक कम कर सकते हैं। अगले 10 वर्षों में यदि हमारी पृथ्वी का तापमान पांच डिग्री बढ़ता है, तो ग्लेशियर और तेजी से पिघलेंगे, ऐसा होने पर न्यूयार्क और मारीशस जैसे शहर डूब जाएंगे। आज वक्त का तकाजा है कि हम अपनी अगली पीढि़यों के सुंदर एवं मंगलमय भविष्य के दृष्टिगत अभी से पर्यावरण के महत्त्व को समझें और उन उपायों को लागू करें, जिनसे मानवीय जीवन सुंदर और सुरक्षित बन सके।

You might also like