समझौता विस्फोट मामले में असीमानंद की मुश्किलें बढ़ी

पंचकूला -स्वामी असीमानंद की मुश्किलें भले चंद दिनों के लिए खत्म हुई थी और एनआईए कोर्ट ने उनको समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में बरी कर दिया था। मगर इस फैसले को पाकिस्तान की नागरिक राहिला वकील ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर मामले में स्वामी असीमानंद और तीन अन्य को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी। याचिका दाखिल करने वाली राहिला एक पाकिस्तानी नागरिक है और उन्होंने दावा किया था कि 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट में उसके पिता भी मारे गए थे। राहिला ने अपने वकील मोमिन मलिक के माध्यम से उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की। इस संबंध में मलिक ने गत शुक्रवार को बताया कि उनकी मुवक्किल के ओर से मैंने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की, जिसमें हमने पंचकूला एनआईए अदालत द्वारा स्वामी असीमानंद और तीन अन्य को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। राहिला वकील विस्फोट में मारे गए पाकिस्तानी नागरिक मुहम्मद वकील की बेटी हैं। एनआईए की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले में कहा था कि मुझे गहरे दर्द और पीड़ा के साथ फैसले का समापन करना पड़ रहा है, क्योंकि विश्वसनीय और स्वीकार्य साक्ष्यों के अभाव की वजह से इस जघन्य अपराध में किसी को गुनहगार नहीं ठहराया जा सका। अभियोजन के साक्ष्यों में निरंतरता का अभाव था और आतंकवाद का मामला अनसुलझा रह गया। अपने 160 पेज के फैसले में जज ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने सबसे मजबूत सबूत अदालत में पेश नहीं किए। स्वतंत्र गवाहों की कभी जांच नहीं की गई।

 

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